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क्रिकेटर विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ मंगलवार को वृंदावन पहुंचे। दोनों ने केली कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद के दर्शन किए। दोनों की इस साल प्रेमानंद जी से यह चौथी मुलाकात है। इस दौरान दोनों संत के सामने हाथ जोड़े बैठे रहे।

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दोनों आम लोगों के साथ बैठकर सत्संग में शामिल हुए। विराट और अनुष्का सुबह 5:30 बजे केली कुंज आश्रम पहुंचे। यहां लगभग 1 घंटे तक रहे।

प्रेमानंद महाराज से अनुष्का-विराट कब-कब मिले, और क्या बातें हुईं….

16 दिसंबर 2025: गुरु दीक्षा की कंठी पहनी

16 दिसंबर को विराट और अनुष्का के गले में तुलसी माला कंठी दिखी। दोनों ने संत प्रेमानंद से दीक्षा ली है। वैष्णव परंपरा में दीक्षा लेने के बाद ही गुरु कंठी माला देता है। हालांकि केलीकुंज आश्रम ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।

अनुष्का ने कहा- महाराज जी हम आपके हैं और आप हमारे। इस पर प्रेमानंद जी ने हंसते हुए कहा- हम सब श्रीजी के हैं। खूब आनंद पूर्वक रहो। मस्त रहो। भगवान के आश्रित रहो। प्रेमानंद जी ने कहा-

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अपने काम को भगवान की सेवा समझिए। गंभीर भाव से रहिए। विनम्र रहिए। जिंदगी को उन्नतिशील बनाना है। जब तक भगवान न मिल जाएं, हमारी यात्रा रुकनी नहीं है। हम लौकिक-पारलौकिक सब क्षेत्रों को पार करते हैं। एक बार ठाकुरजी को भी देखें, जिसके हम असली में हैं।

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14 मई, 2025: विराट-अनुष्का 2 घंटे 20 मिनट आश्रम में रहे

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद संत प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे।

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद संत प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे।

विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अनुष्का के साथ प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे थे। दोनों ने दंडवत प्रणाम कर आशीर्वाद लिया। प्रेमानंद महाराज ने विराट और अनुष्का से पूछा- प्रसन्न हो? इस पर विराट ने मुस्कुराकर कहा- हां। महाराज ने दोनों को आशीर्वाद दिया- जाओ, खूब आनंदित रहो, नाम जप करते रहो। इस पर अनुष्का ने पूछा- बाबा क्या नाम जप से सबकुछ पूरा हो जाएगा? महाराज ने कहा- हां, सब पूरा होगा।

प्रेमानंद महाराज ने कहा- वैभव मिलना कृपा नहीं है। यह पुण्य है। भगवान की कृपा अंदर का चिंतन बदलना है। इससे आपके अनंत जन्मों के संस्कार भस्म होते हैं और अगला जन्म बड़ा उत्तम होता है।

भगवान जब कृपा करते हैं तो संत समागम देते हैं। दूसरी कृपा जब होती है तो विपरीतता देते हैं और फिर अंदर से एक रास्ता देते हैं। यह शांति का रास्ता नहीं। भगवान वो रास्ता देते हैं और जीव को अपने पास बुला लेते हैं। बिना प्रतिकूलता के संसार का राग नष्ट नहीं होता। अनुष्का-विराट करीब 2 घंटे 20 मिनट आश्रम में रहे थे।

10 जनवरी, 2025: प्रेमानंद महाराज ने कहा था- अभ्यास जारी रखें, जीत निश्चित

विराट कोहली, पत्नी अनुष्का शर्मा और दोनों बच्चों के साथ प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे। अनुष्का ने प्रेमानंद महाराज से भक्ति के लिए आशीर्वाद मांगा।

बातचीत के दौरान विराट ने पूछा, ‘असफलता से कैसे निकलें। महाराज ने जवाब में कहा, ‘अभ्यास जारी रखें, जीत निश्चित है। अपने अभ्यास को निरंतर और नियंत्रण में रखते हुए आगे बढ़ें। जैसे मेरे लिए नाम जप एक साधना है, वैसे ही विराट के लिए क्रिकेट ही साधना है। बस बीच-बीच में भगवान का नाम लेते रहें।’

उन्होंने कहा, ‘विजय के लिए दो चीजों की आवश्यकता होती है। एक अभ्यास और दूसरा प्रारब्ध। यदि प्रारब्ध नहीं है, सिर्फ अभ्यास है, तब जीत मुश्किल हो जाती है। इसके लिए प्रभु के ज्ञान के साथ-साथ उनका नाम जपना आवश्यक है।’

विराट और अनुष्का के साथ उनके दोनों बच्चे थे।

विराट और अनुष्का के साथ उनके दोनों बच्चे थे।

अनुष्का ने पूछा- पिछली बार जब हम आए थे तो मन में कुछ सवाल थे, लेकिन मैं पूछ नहीं पाई। मैं आपसे मन ही मन बात कर रही थी। मेरे मन में जो सवाल थे, उसे कोई न कोई पूछ लेता था।

प्रेमानंद महाराज बोले- श्रीजी वो व्यवस्था कर देती हैं। सबसे बड़ी बात, हम साधना देकर लोगों को प्रसन्नता दे रहे हैं। और ये पूरे भारत को प्रसन्नता एक खेल में देते हैं।

अगर ये विजयी हुए तो हमारे पूरे भारत में पटाखे छूटते हैं। पूरे भारत में आनंद मनाया जाता है। क्या ये इनकी साधना नहीं है? ये भी तो उनकी साधना है। इनके साथ पूरा भारत जुड़ा हुआ है। अगर ये विजयी हुए तो बच्चा-बच्चा आनंदित हो जाता है, तो ये भी एक साधना है।

अनुष्का-विराट ने दंडवत होकर प्रेमानंद महाराज को प्रणाम किया था।

अनुष्का-विराट ने दंडवत होकर प्रेमानंद महाराज को प्रणाम किया था।

विराट ने पूछा- असफलता में हमें कैसे रहना है? महाराज बोले- उस समय हमको भगवान का चिंतन करते हुए धैर्य रखना है। ये बड़ा कठिन है। असफलता में कोई धैर्यपूर्वक मुस्कुरा के निकल जाए, ये बहुत बड़ी बात होती है। असफलता हमेशा नहीं रहेगी। दिन है तो रात आएगी, रात है तो दिन आएगा। हमको धैर्यपूर्वक भगवान का स्मरण करना चाहिए। पर यह बहुत कठिन है, क्योंकि जो सम्मान सफलता में मिलता है वो असफलता में नहीं मिलता।

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