शाहजहांपुर6 घंटे पहले
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बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव चेक बाउंस मामले में 30 दिनों की अंतरिम जमानत पर हैं। तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद बुधवार को राजपाल शाहजहांपुर में अपने पैतृक गांव कुंडरा पहुंचे। तमाम लोग उनसे मिलने पहुंचे।
मीडिया से बातचीत में राजपाल यादव ने कहा, मेरे लिए जेल एक चिंतन शिविर जैसा रहा है। जिस तरह देश की हर व्यवस्था अपग्रेड हो रही है, वैसे ही जेलों को भी आधुनिक बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा, जेलों में स्मोकिंग जोन बनाया जाना चाहिए। ताकि दूसरों को कोई बीमारी न हो। कोई प्रभावित न हो।
राजपाल ने कहा, हम स्मोकिंग को प्रमोट नहीं कर रहे हैं। लेकिन जब देश में इसकी बिक्री होती है और इसका कारोबार चलता है तो जेल और सुधार गृहों में इसके लिए भी अलग जगह होनी चाहिए। हम खुद भी धूम्रपान के शिकार हैं, छोड़ने की बहुत कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अभी तक पूरी तरह छोड़ नहीं पाए।

तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद राजपाल यादव शाहजहांपुर पहुंचे। लोगों ने उनके साथ सेल्फी ली।
राजपाल बोले- 600 करोड़ लोग मुझे नाम से जानते हैं कॉमेडियन राजपाल ने कहा, पूरी दुनिया में मेरे प्रशंसक हैं। 800 करोड़ लोगों की आबादी में से लगभग 600 करोड़ लोग मुझे नाम से जानते हैं।
राजपाल ने खुद को भारतीय सिनेमा का एक जिम्मेदार अभिनेता बताया, जो कॉमेडी, गंभीर और विविध प्रकार की भूमिकाएं निभाना जानता है। उन्होंने कहा, कला एक विज्ञान है और मैं खुद को विज्ञान का विद्यार्थी मानता हूं।
मेरे लिए आटा, दाल, चावल और खेती-बाड़ी जीवन का आधार रहे हैं। जिस गांव में मैं खड़ा हूं, इससे मेरा बचपन का नाता है। कला को जीने की जो भूख मेरे भीतर है, वही मेरी असली पूंजी है। पिछले 30 साल में मुझे कभी काम ढूंढना नहीं पड़ा, क्योंकि मैं काम को जीता हूं। जब तक मेरे शरीर में सांस है, तब तक यह सब लोगों के आशीर्वाद और साथ का परिणाम है।
जेल में बीते पल एक ‘चिंतन शिविर’ की तरह
राजपाल यादव ने कहा, मैं बड़ी जिम्मेदारी से कह रहा हूं तिहाड़ जेल मेरे लिए एक चिंतन शिविर रही। जब देश में हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है, तो जेलों का भी आधुनिकीकरण होना चाहिए। कानून सबके लिए बराबर है। कानून से बड़ा कोई नहीं है। हम सभी कानून के अधीन हैं। कानून सजा देता है, लेकिन कैदियों के आचरण, व्यवहार और संस्कार को भी देखा जाना चाहिए।
मेरी इच्छा है कि कम से कम 10 प्रतिशत ऐसे कैदियों को, जो सजायाफ्ता हैं और बार-बार अदालत नहीं जा पाते, उनके अच्छे आचरण और व्यवहार के आधार पर एक नया जीवन जीने का अवसर दिया जाए। ऐसे हजारों लोग समाज की धरोहर बन सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यह नहीं कह रहे कि किसे रिहा किया जाए और किसे नहीं, बल्कि इस विषय पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

राजपाल यादव ने घर पहुंचकर अपने डॉग को दुलारा।
राजपाल बोले- घृणा पाप से करो, पापी से नहीं
राजपाल यादव ने कहा, घृणा पाप से करनी चाहिए, पापी से नहीं। यदि हर जगह, जैसे एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर, स्मोकिंग एरिया बनाए जाते हैं, तो जेलों में भी प्रत्येक वार्ड में एक या दो धूम्रपान क्षेत्र निर्धारित होने चाहिए। ताकि अन्य लोग उसके प्रभाव से बच सकें। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे स्वयं धूम्रपान की आदत से ग्रस्त हैं और बहुत प्रयासों के बावजूद इसे छोड़ नहीं पा रहे हैं।
गांव में राजपाल यादव का आलीशान मकान…

शाहजहांपुर के कुंडरा गांव में राजपाल यादव का आलीशान मकान है।

राजपाल पिछले साल अपने पिता नौरंगी लाल के निधन पर गांव आए थे।

गांव में उनके बड़े भाई श्रीपाल और उनका परिवार रहता है।
क्यों जेल में बंद थे राजपाल यादव? साल 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। ये फिल्म फ्लॉप रही और राजपाल यादव को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।
राजपाल समय रहते कर्ज की रकम नहीं लौटा सके। लोन लेते समय राजपाल ने जो चेक कंपनी को दिए थे वो बाउंस हो गए, जिसके बाद एक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। दोनों पार्टी के बीच समझौते के बावजूद पूरी पेमेंट नहीं हुई और समय के साथ ब्याज जुड़ता गया, जिससे कुल कर्ज काफी बढ़ गया।
साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली, क्योंकि उन्होंने भुगतान और समझौते का भरोसा दिया था।
हालांकि, फरवरी की शुरुआत में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टर को पूर्व में दी गई रियायतों और समय सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को शाम लगभग 4 बजे आत्मसमर्पण किया।

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव 17 फरवरी, 2026 को तिहाड़ जेल से 18 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा हो गए हैं। वह 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में 12 दिनों तक जेल में रहे।
सरेंडर से पहले कहा था- मेरे पास पैसे नहीं हैं सरेंडर करने से पहले राजपाल ने कहा था कि उनके पास लौटाने के लिए पैसे नहीं हैं। जब वो जेल गए तो सोनू सूद ने इंडस्ट्री से एकजुट होकर एक्टर की मदद करने की अपील की। इसके बाद कई लोग राजपाल यादव की मदद के लिए आगे आए। सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन जैसे कई लोगों ने एक्टर को आर्थिक मदद दी।
राजपाल यादव 17 फरवरी, 2026 को तिहाड़ जेल से 18 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा हुए। वह 12 दिनों तक जेल में रहे।
हंगामा, हलचल जैसी फिल्मों से कॉमेडी किंग बने 2003 में फिल्म हंगामा, 2005 में गरम मसाला, 2006 में चुप चुप के और फिर हेरा फेरी और 2007 में भूल भुलैया जैसी फिल्मों से उन्हें कॉमेडी मे पहचान मिली। कॉमिक डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ उन्होंने लगभग 8 से 10 फिल्मों मे काम किया है। बेस्ट वर्सटाइल एक्टर अवॉर्ड जीत चुके हैं राजपाल
राजपाल यादव को यश भारती अवॉर्ड मिला, जो उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान है। उन्हें यह अवॉर्ड 2003 की फिल्म ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ के लिए मिला। यह सम्मान उनके कॉमेडी और गंभीर अभिनय के रोल के लिए दिया गया था। इससे पहले यह अवॉर्ड अमिताभ बच्चन और जया बच्चन जैसे बड़े नामों को मिल चुका है। उन्हें फिल्मफेयर और आईफा जैसे प्लेटफॉर्म पर बेस्ट कॉमिक एक्टर के लिए नॉमिनेट किया गया, लेकिन वे यह अवॉर्ड नहीं जीत पाए।

‘मुंबई मे पहला सपना सिर्फ जिंदा रहना था’ एनएसडी से पढ़ाई पूरी होने के बाद राजपाल मुंबई आए। शुरुआत में उन्हें कोई सपोर्ट नहीं मिला। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनका पहला सपना मुंबई में जिंदा रहना था। कुछ समय के संघर्ष के बाद उन्हें काम मिलना शुरू हो गया। स्ट्रगल के दिनों में राजपाल ने 20-22 स्ट्रगलिंग एक्टर्स को अपने घर पर खाना खिलाया। एक इंटरव्यू मे नवाजुद्दीन सिद्दीकी बताते हैं कि, ‘राजपाल का घर लंगर जैसा था, फ्री का खाना और रहना।’
छोटू और बटला कहते थे स्कूल के दोस्त राजपाल यादव की हाइट लगभग 5 फीट 1 इंच है। स्कूल में छोटी हाइट की वजह से दोस्त उन्हें छोटू और बौना कहकर बुलाते थे। 20 साल की उम्र में गांव की ऑर्डनेंस क्लोदिंग फैक्ट्री में नौकरी मिली।
20 साल की उम्र में शादी राजपाल यादव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वे लगभग 20 साल के थे, तब उनके परिवार ने उनकी शादी करा दी थी। उस समय वे गांव में ही रहते थे और नौकरी की शुरुआत कर रहे थे।

राजपाल यादव अपनी दूसरी पत्नी राधा यादव के साथ।
बेटी के जन्म के 15 मिनट बाद पत्नी का निधन एक इंटरव्यू में राजपाल यादव ने बताया कि वे 20 साल के थे जब घरवालों के दबाव में उनकी शादी कराई गई। उनकी पहली पत्नी का नाम करुणा था। एक साल बाद बेटी ज्योति का जन्म हुआ, लेकिन डिलीवरी के 15 मिनट बाद ही उनकी पत्नी का निधन हो गया।
वे कहते हैं, ‘मैं अगले दिन उनसे मिलने वाला था, लेकिन उनकी डेड बॉडी को कंधे पर उठाकर ले गया। 20 साल की उम्र में इतना दर्द सहना आसान नहीं होता।’ इसके बाद वे अकेले पिता बन गए और ज्योति की देखभाल उनकी मां और भाभी ने की।
राजपाल ने एक इंटरव्यू में बताया कि दूसरी पत्नी राधा से उनकी मुलाकात कनाडा में हुई थी। उस समय वे सनी देओल और प्रीति जिंटा की फिल्म हीरो: लव स्टोरी ऑफ स्पाई की शूटिंग कर रहे थे। वहीं एक कॉमन फ्रेंड के जरिए मुलाकात हुई और 10 जून 2003 को दोनों ने शादी कर ली।

2016 में अपनी पोलिटिकल पार्टी बनाई 2016 में राजपाल यादव ने सर्व संभाव पार्टी (SSP) नाम से नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च की। पार्टी का गठन वृंदावन में हुआ था। वे पार्टी के जनरल सेक्रेटरी और स्टार कैंपेनर थे, लेकिन खुद चुनाव नहीं लड़ने वाले थे।
पार्टी का मोटो, ‘विवाद की नहीं, संवाद की राजनीति’ था। उन्होंने गीता, कुरान, बाइबिल, गुरु ग्रंथ साहिब, रामायण और संविधान पर हाथ रखकर ईमानदारी से काम करने की कसम खाई।
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 403 में से करीब 390-400 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। पार्टी का मुख्यालय लखनऊ में था। उनके दो भाई श्रीपाल सिंह यादव (बिसलपुर) और राजेश सिंह यादव (तिलहर) पार्टी से चुनाव लड़े, लेकिन पार्टी को कोई बड़ी सफलता नहीं मिली।
3 बार मौत से बचे राजपाल यादव एक इंटरव्यू मे राजपाल यादव बताते हैं कि वो तीन बार जानलेवा हादसों से बचे हैं। एक बार गंगा जी में नहाते समय वे गहरे पानी में चले गए और बेहोश हो गए थे। इसके अलावा एक बार बैलगाड़ी के नीचे आने से और एक बार जंगली कुत्तों के हमले जैसी स्थिति से भी वे बाल-बाल बचे।
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