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लखनऊ में फर्जी दस्तावेजों के जरिए जीएसटी फर्म रजिस्टर कर करोड़ों का फर्जी लेनदेन और 37 लाख रुपए की टैक्स चोरी करने वाले तीन जालसाजों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि मुख्य आरोपी सहित अभी चार लोग फरार चल रहे हैं। छद्म बिजली बिल से कराया फर्म का रजिस्ट्रेशन डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि 3 नवंबर 2025 को भगवती चरण वर्मा ने महानगर का फर्जी पता दिखाते हुए M/S K S Enterprises नाम से जीएसटी नंबर लिया था। फर्म के नाम पर करोड़ों की खरीद-बिक्री दिखाई गई थी। जांच में सामने आया कि दिए गए पते पर न तो कोई दफ्तर था और न ही फर्म का कोई अस्तित्व है। मकान मालिक ने भी इसे फर्जी बताया था। 4.70 करोड़ का लेनदेन, ITC का गलत लाभ विवेचना के दौरान पता चला कि दीपक नामक युवक ने साथियों के साथ मिलकर अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करते हुए फर्जी फर्म के जरिए करीब 4 करोड़ 70 लाख रुपए का लेनदेन किया। फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाकर सरकार को कुल 37,52,545 रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया था।
15 लाख रुपए चेक से ट्रांसफर जांच में सामने आया कि लेनदेन की राशि में से करीब 15 लाख रुपए चार चेक के जरिए प्रशांत तिवारी को दिए गए, जिनका उपयोग उसने घरेलू कामों में किया। कैलाश मौर्या पर फर्जी मुहर तैयार कर बैंक खाते खुलवाने और जीएसटी चोरी में सहयोग का आरोप है। ऐसे रचते थे साजिश पुलिस के अनुसार आरोपियों ने तेजी से पैसा कमाने के लालच में फर्जी बिजली बिल तैयार किया। इसके आधार पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया गया।
लखनऊ में फर्जी GST फर्म से 37 लाख की टैक्स:3 गिरफ्तार, फर्जी बिजली बिल से कराया रजिस्ट्रेशन, कंपनी पर दिखाया 4.70 करोड़ का लेनदेन
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