Hindu Nav Varsh 2026 UP Weather Prediction; Adhik Maas Mythology

Actionpunjab
7 Min Read


लखनऊ2 घंटे पहलेलेखक: सृष्टि विश्वकर्मा

  • कॉपी लिंक

जहां पूरी दुनिया में नया साल 1 जनवरी को मनाया जाता है। वहीं हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है। इस साल यह 19 मार्च को पड़ रही है। इस बार हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ नव संवत्सर 2083 शुरू होगा। यह संवत्सर धार्मिक और पंचांग की दृष्टि से काफी खास माना जा रहा है। इस बार विक्रम संवत में 12 नहीं, 13 महीने होंगे।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि नव संवत्सर 2083 में क्या खास रहेगा? किस ग्रह का प्रभाव ज्यादा होगा? 13 महीने होने से आम लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा? पढ़िए, इस रिपोर्ट में…

नव संवत्सर 2083 कब और किस दिन से शुरू होगा?

बीएचयू के एस्ट्रोलॉजर प्रो. विनय पांडे के अनुसार, विक्रम संवत 2083 की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होगी। यह गुरुवार, 19 मार्च को पड़ेगी। 19 मार्च को ही देश के अलग-अलग हिस्सों में गुड़ी पड़वा और उगादी का पर्व मनाया जाएगा।

इसके साथ ही चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत होगी। यह हर साल चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि से ही शुरू होती है। चैत्र नवरात्रि इस बार 19 से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेंगे।

क्यों खास है विक्रम संवत 2083?

विनय पांडे के अनुसार, विक्रम संवत 2083 इसलिए खास माना जा रहा, क्योंकि इस साल हिंदू कैलेंडर में एक अधिक महीना जुड़ जाएगा। यानी यह संवत्सर सामान्य 12 महीनों का नहीं, 13 महीनों का होगा। इस एक महीने को अधिक मास कहा जाता है। इसे मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।

प्रो. पांडेय के अनुसार, भारतीय कालगणना पद्धति में हम चैत्र-वैशाख आदि महीनों का व्यवहार चंद्र मान से, तो वर्ष का व्यवहार सौर मान से करते हैं। इसलिए सौर और चंद्रमा मान में सामंजस्य बैठाने के लिए हर तीसरे साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है। यही वजह है, विक्रम संवत 2083 धार्मिक और पंचांग की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कब होगा अधिक मास?

गोरखपुर के एस्ट्रोलॉजर नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं- विक्रम संवत 2083 में ज्येष्ठ महीने में अधिक मास आएगा। यह अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा।

अधिक मास आने की वजह से साल के आगे आने वाले व्रत और त्योहारों की तारीखें 15 से 20 दिन आगे खिसक जाएंगी। इस साल एक नहीं, बल्कि 2 महीने ज्येष्ठ होंगे। पहले 15 दिन सामान्य ज्येष्ठ माह होंगे, इसके बाद 30 दिन अधिक ज्येष्ठ मास के होंगे। अंत के 15 दिन फिर सामान्य ज्येष्ठ मास के होंगे।

इस दौरान किस ग्रह का प्रभाव ज्यादा रहेगा?

विक्रम संवत 2083 में गुरु (बृहस्पति) ग्रह का प्रभाव अधिक माना जा रहा है। नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, गुरु को ज्ञान, धर्म, नीति और विस्तार का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में इस साल लोगों का रुझान धार्मिक, आध्यात्मिक और सीखने-समझने वाले कामों की ओर ज्यादा रह सकता है।

गुरु के प्रभाव से शिक्षा, सलाह-मशविरा, न्याय और सोच-समझकर लिए जाने वाले फैसलों को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं, बड़े निर्णयों में जल्दबाजी के बजाय धैर्य और संतुलन देखने को मिल सकता है। अधिक मास के कारण यह प्रभाव और भी स्पष्ट हो सकता है, जिससे लोग आत्मचिंतन और सुधार पर ज्यादा ध्यान देंगे।

इसका यूपी के मौसम और घटनाओं पर क्या असर पड़ेगा विक्रम संवत 2083 में अधिक मास पड़ने के कारण साल का पंचांग थोड़ा आगे खिसक जाएगा। इसका असर यूपी के मौसम पर भी देखने को मिल सकता है।

ज्येष्ठ महीने में होगी भीषण गर्मी यूपी में इस साल गर्मी का असर सामान्य से कुछ ज्यादा समय तक बना रह सकता है। बीएचयू के मौसम विभाग के प्रो. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, अप्रैल-मई की तपिश लंबी चलने की संभावना है। वहीं, मानसून के आने में थोड़ी देरी हो सकती है। या फिर शुरुआती दिनों में बारिश असमान रह सकती है। कुछ इलाकों में तेज बारिश तो कुछ जगहों पर कम बारिश की स्थिति बन सकती है।

इसका सीधा असर खेती-किसानी पर भी पड़ेगा। खरीफ फसलों की बुआई की तारीखें आगे-पीछे हो सकती हैं। किसानों को मौसम को देखते हुए फैसले लेने पड़ेंगे। हालांकि, अगर मानसून ठीक से सक्रिय हुआ तो फसलों के लिए हालात बेहतर भी हो सकते हैं।

वाराणसी के एस्ट्रोलॉजर श्रीधर पांडेय के मुताबिक, अधिक मास के कारण यूपी में यह साल मौसम के लिहाज से उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है। गर्मी और बारिश दोनों में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसलिए लोगों को स्वास्थ्य, पानी और खेती से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

—————————

ये खबर भी पढ़ें…

UP में 3 या 4 मार्च, होली कब मनाई जाएगी, भद्रा और चंद्रगहण का साया; ज्योतिषाचार्य बोले- इस संयोग में रंग नहीं खेले जाएंगे

इस साल होली पर्व पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 2 मार्च को होलिका दहन पर भद्रा का साया पड़ रहा है, जबकि अगले दिन 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा। इससे लोगों में असमंजस की स्थिति है। ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि 3 मार्च को होली मनाना शास्त्रों के अनुसार ठीक नहीं है। पढ़िए पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *