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इस बार कई पहाड़ी इलाकों में देर से ही सही, पर भारी बर्फबारी के बावजूद हिमाचल में जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिख रहा है। 11वीं शताब्दी से अडिग खड़े ऐतिहासिक बौद्ध मठ हों या 13,596 फीट की ऊंचाई पर बना एशिया का सबसे ऊंचा चिचम ब्रिज-ये सभी आज कम बर्फबारी के कारण अपनी पहचान खो रहे हैं। कभी सर्दियों में 7 फीट तक बर्फ की मोटी चादर में लिपटे रहने वाले देश के पहले मतदाता श्याम शरण नेगी के कल्पा जैसे गांव अब ‘स्नो ड्राउट’ (बर्फ के सूखे) की चपेट में हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1991-2000 के दशक की तुलना में दिसंबर की बर्फबारी में 86% और जनवरी में 47% तक की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। विरासत जो संकट में हैं बौद्ध मठ: 1008-1064 ई. का मठ (गोम्पा) स्पीति घाटी में 13,668 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यहां सैकड़ों लामा रहते हैं। चिचम ब्रिज: चिचम ब्रिज 13,596 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसे एशिया में सबसे ऊंचाई पर बने पुल का दर्जा है।
हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का असर:11वीं सदी के मठों में इस बार बर्फ का सूखा, 47% कम हुई बर्फबारी
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