चंडीगढ़ में पॉलिथीन खाने पर पशु मजबूर:सड़कों पर लगे ढेर, रोक पर मेयर ने प्रशासक को लिखा पत्र, सफाईकर्मी सेल्फी तक सीमित

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नगर निगम चंडीगढ़ एक तरफ शहर को प्लास्टिक और पॉलिथीन मुक्त बनाने की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ सड़कों पर प्लास्टिक कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इन ढेरों से आवारा पशु खाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी जान पर खतरा बना रहता है। इस स्थिति को देखते हुए चंडीगढ़ के नए मेयर सौरभ जोशी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने शहर को तुरंत “जीरो-पॉलिथीन सिटी” घोषित करने और पॉलिथीन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। मेयर ने इस संबंध में चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कड़ा कदम नहीं उठाया गया तो शहर की सफाई व्यवस्था और पशुओं की सुरक्षा दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा। सफाईकर्मी सेल्फी तक सीमित शहर में तैनात सफाईकर्मी सुबह के समय नगर निगम द्वारा बनाए गए व्हाट्सऐप ग्रुप में सफाई करते हुए अपनी फोटो डाल देते हैं। इसके बाद ज्यादातर आराम से बैठ जाते हैं। ऐसा ही हाल गांव मलोया में भी देखा जा रहा है, जहां सुबह के समय केवल बस स्टैंड पर सफाई कर फोटो खींच ली जाती है। इसके बाद अगर गांव के अंदर या मुख्य सड़क पर जाकर देखा जाए तो कूड़े के ढेर लगे मिलते हैं। इसको लेकर जब लोगों ने नगर निगम की मेडिकल ऑफिसर हेल्थ (MOH) डॉ. इंद्रप्रीत कौर से संपर्क करना चाहा, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। हो रही खुलेआम बिक्री और इस्तेमाल मेयर ने अपने पत्र में कहा कि मौजूदा प्रतिबंधों के बावजूद शहर में पॉलिथीन की खुलेआम बिक्री और इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पर्यावरणीय संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने इसे केवल सफाई व्यवस्था की लापरवाही नहीं, बल्कि ‘सिटी ब्यूटीफुल’ की पहचान पर सीधा खतरा बताया। मेयर ने आवारा पशुओं, खासकर गाय की दुर्दशा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कूड़े के ढेर से भोजन की तलाश में गायें पॉलिथीन निगलने को मजबूर हैं, जिससे उनके पेट में गंभीर रुकावटें पैदा हो रही हैं। कई मामलों में यह तकलीफदेह मौत का कारण बन रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ माता की रक्षा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रश्न है। गांवों में कबाड़ गतिविधियों से खेत और भूजल प्रदूषित मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि शहर के पास स्थित गांवों में बिना नियंत्रण के चल रही कबाड़ की दुकानों से भी बड़ी समस्या पैदा हो रही है। प्लास्टिक कचरे की छंटाई करते समय उसका कूड़ा इधर-उधर फैल जाता है और खेतों तक पहुंच जाता है। इससे जमीन की उपजाऊ ताकत कम हो रही है और पानी भी गंदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गांव के पर्यावरण और लोगों की सेहत, दोनों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। मेयर ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में पॉलिथीन बनाने, जमा करने और बेचने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कबाड़ के यार्ड को घेरकर रखा जाए और उन पर कड़ी निगरानी की जाए, ताकि प्लास्टिक कचरा इधर-उधर न फैले। इसके अलावा प्लास्टिक से अलग कचरा इकट्ठा करने के लिए विशेष केंद्र बनाए जाएं और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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