Kamdev and lord shiva story, holi 2026, holi festival significance in hindi, phalguna purnima, vasant utsav, holika dahan 2026

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18 घंटे पहले

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2 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा है, इसी तारीख की रात में होलिका दहन किया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा पर बसंत उत्सव मनाने की परंपरा है। इस दिन से बसंत ऋतु की शुरूआत होती है। बसंत को ऋतुराज कहा जाता है। पौराणिक कथा है कि कामदेव ने शिव जी का तप भंग करने के लिए बसंत ऋतु को प्रकट किया था।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शिव पुराण में कथा है कि देवी सती ने अपने पिता दक्ष के यहां हवन कुंड में कूदकर देह त्याग दी थी। सती के जाने के बाद वियोग में शिव जी ध्यान में बैठ गए थे। उस समय असुरों का राजा तारकासुर था, वह जानता था कि शिव जी तपस्या में बैठे हैं, उनका तप तोड़ पाना देवताओं के लिए भी असंभव है। सती के जाने के बाद शिव जी दूसरा विवाह भी नहीं करेंगे।

तारकासुर ने तप करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर लिया। ब्रह्मा जी प्रकट हुए तो तारकासुर ने वर मांगा कि मेरी मृत्यु सिर्फ शिव जी के पुत्र के द्वारा ही हो। ब्रह्मा को तारकासुर की तपस्या की वजह से यह वरदान देना पड़ा। वरदान पाकर तारकासुर का आतंक बढ़ गया, उसने सभी देवताओं को पराजित कर दिया और स्वर्ग भी जीत लिया।

भगवान विष्णु भी ब्रह्मा जी के वरदान की वजह से तारकासुर का वध नहीं कर सकते थे। सभी देवताओं ने योजना बनाई कि किसी तरह शिव जी का तप भंग किया जाए और उन्हें दूसरा विवाह करने के लिए तैयार किया जाए, तभी तारकासुर का अंत होगा।

शिव जी का तप भंग करने के लिए देवताओं ने कामदेव से मदद मांगी। कामदेव ने फाल्गुन पूर्णिमा पर शिव जी का तप भंग करने के लिए बंसत ऋतु को प्रकट किया। इस ऋतु में न ज्यादा ठंड लगती है, न ही गर्मी होती है, शीतल हवाएं चलती हैं, मौसम सुहावना रहता है, सरसों के खेत में पीले फूल दिखने लगते हैं, आम के पेड़ों पर केरी के बौर आने लगते हैं। गीता में श्रीकृष्ण ने बसंत ऋतु को खुद का ही स्वरूप बताया है।

बसंत ऋतु के सुहावने मौसम और कामदेव के बाणों की वजह से शिव जी का ध्यान टूट गया। शिव जी का ध्यान टूटते ही उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया, जिससे कामदेव भस्म हो गए।

ब्रह्मा जी, विष्णु जी और अन्य सभी देवताओं ने शिव जी प्रार्थना की तो उनका गुस्सा शांत हुआ। देवताओं ने शिव जी को तारकासुर और ब्रह्मा जी के वरदान के बारे में बताया। तब शिव जी सृष्टि के हित में दूसरा विवाह करने के लिए तैयार हो गए।

शिव जी शांत हुए तो कामदेव की पत्नी रति ने भगवान से प्रार्थना की कि वे कामदेव को फिर से जीवित कर दें। तब शिव जी ने रति से कहा कि कामदेव द्वापर युग में श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लेंगे। इसके बाद शिव जी और माता पार्वती का विवाह हुआ। विवाह के बाद कार्तिकेय स्वामी का जन्म हुआ और कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया।

फसल आने पर उत्सव मनाने की है परंपरा

फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास गेहूं, चने की और अन्य अनाजों की फसल आना शुरू हो जाती है। फसल तैयार होने पर रंग-गुलाल उड़ाकर खुशियां मनाने की परंपरा पुराने समय से ही चली आ रही है। फसल पकने की खुशी में लोग अबीर-गुलाल लगाकर एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होते हैं, मिठाइयां खिलाते हैं, पकवान बनाए जाते हैं। किसान जलती हुई होली में नई फसल का कुछ भाग प्रकृति को और भगवान को भोग के रूप में चढ़ाते हैं। ये नई फसल के लिए भगवान का आभार मानने का पर्व भी है।

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