यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ आंदोलन:8 को दिल्ली में होगा विशाल प्रदर्शन, जन आंदोलन तेज करने की चेतावनी

Actionpunjab
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धौलपुर में सवर्ण समाज समन्वय समिति और एकीकृत सामान्य वर्ग भारतवर्ष समिति ने यूजीसी के नए नियमों का विरोध किया है। इस दौरान क्षत्रिय करणी सेवा के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत और महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संगीता सिंह ने यूजीसी के 2026 में लागू होने वाले नए नियमों पर गंभीर आपत्तियां जताईं। दिल्ली के रामलीला मैदान में होगा जनआंदोलन
वक्ताओं ने घोषणा की कि यूजीसी के इन नियमों के विरोध में 8 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल जनआंदोलन आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर से सामान्य एवं अनारक्षित वर्ग के लोग शामिल होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी के नए नियमों को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। नियमों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग
डॉ. राज शेखावत ने कहा कि यूजीसी के नए नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में वर्णित समानता, भेदभाव-निषेध और गरिमामय जीवन के मौलिक अधिकारों के विरुद्ध हैं। उन्होंने इन नियमों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि नई राजपत्र अधिसूचना में प्रयुक्त परिभाषाओं को स्पष्ट, सीमित और गैर-मनमाना बनाया जाए। इससे नियमों के दुरुपयोग की संभावना समाप्त होगी और कानून के समक्ष समान संरक्षण का सिद्धांत सुनिश्चित हो सकेगा। सामान्य वर्ग को संवैधानिक संरक्षण देने की मांग
यह भी मांग की गई कि नियमों में संशोधन कर सामान्य एवं अनारक्षित वर्ग को स्पष्ट और प्रभावी संवैधानिक संरक्षण दिया जाए। साथ ही, प्रस्तावित समानता समितियों में संतुलित, निष्पक्ष और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि किसी एक वर्ग का प्रभुत्व स्थापित न हो। डॉ. संगीता सिंह ने झूठी शिकायतों पर कठोर प्रावधानों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नियमों में झूठी, दुर्भावनापूर्ण या तथ्यहीन शिकायतों पर रोक लगाने के लिए दंडात्मक प्रावधान जोड़े जाने चाहिए, ताकि निर्दोष व्यक्तियों की प्रतिष्ठा और मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके। नेताओं ने कहा कि वे संविधान के तहत समान अधिकारों के समर्थक हैं और ऐसे नियम बनाए जाने चाहिए जो सामाजिक समरसता, एकता और समानता को मजबूत करें। उन्होंने दोहराया कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 8 मार्च का आंदोलन एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले लेगा।

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