रोडवेज की इंसेंटिव योजना में माइलेज और सवारी का दबाव:50 प्रतिशत सीट भरने का टारगेट, चालक परिचालक बोले -त्योहार में बढ़ा वर्कलोड, तय समय नहीं

Actionpunjab
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होली के त्योहार पर जहां एक ओर परिवहन निगम ने 10 दिनों तक प्रतिदिन 300 किलोमीटर बस संचालन करने वाले चालक-परिचालकों को 360 रुपये प्रतिदिन यानी कुल 3600 रुपये तक प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत अलग तस्वीर पेश कर रही है। लखनऊ के आलमबाग बस अड्डा पर दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि प्रोत्साहन राशि से ज्यादा कर्मचारियों को गाड़ी की माइलेज, सवारियों की संख्या और तय टारगेट पूरा न होने पर वेतन कटने की चिंता सता रही है। इंसेंटिव से ज्यादा इनकम का दबाव जौनपुर डिपो के परिचालक अनुज तिवारी बताते हैं कि त्योहार के दौरान वर्कलोड कई गुना बढ़ गया है। “हम लोगों का कोई तय समय नहीं है। विभाग को इनकम चाहिए। बस अड्डे जाम पड़े हैं, लेकिन कहा जाता है कि गाड़ी लेकर जाइए और अच्छा इनकम लेकर आइए।” उनका कहना है कि भीड़ और ट्रैफिक के बीच लक्ष्य पूरा करना बेहद मुश्किल हो रहा है, लेकिन दबाव लगातार बना हुआ है। माइलेज का टारगेट, वरना सैलरी कट चालक श्याम बिहारी यादव ने बाताया की त्योहार में सबसे बड़ा दबाव माइलेज का है। “हमें 5.80 किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज देने का टारगेट दिया गया है, जबकि कंपनी इस बस का क्लेम 5 किलोमीटर प्रति लीटर का करती है। जाम में खड़े रहो या सड़क खाली हो, विभाग को एवरेज से मतलब है,” वे कहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि एवरेज नहीं निकलता तो इंसेंटिव तो दूर, वेतन से भी कटौती कर ली जाती है। 300 किलोमीटर प्रतिदिन चलाने का लक्ष्य भी जोखिम बढ़ा रहा है। “लगातार गाड़ी चलाने से हादसे भी होते हैं, लेकिन विभाग को इसकी परवाह नहीं।” 50% सीट भरने का टारगेट बस्ती डिपो के परिचालक गिरीश पांडे का कहना है कि 50 प्रतिशत सीट भरने का लक्ष्य दिया गया है। “भीड़ हर रूट पर नहीं है। जहां सवारी कम है वहां टारगेट पूरा नहीं हो पा रहा। हमारी ड्यूटी 24 घंटे तक खिंच जाती है। कर्मचारियों का कहना है कि सवारी कम होने पर भी आय का लक्ष्य तय है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ रहा है। ‘जनरथ’ चालक बोले -6 किमी माइलेज की मांग महोबा-लखनऊ रूट पर चलने वाली जनरथ बस के चालक शैलेंद्र कुमार बताते हैं कि 300 किलोमीटर प्रतिदिन संचालन पर इंसेंटिव की घोषणा है, लेकिन शर्तें कठिन हैं। “हमसे 6 किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज मांगा जाता है। अगर एवरेज या सवारी पूरी नहीं हुई तो वेतन काट लिया जाता है। हमारी कोई सुनवाई नहीं होती।
प्रोत्साहन या दबाव त्योहार पर यात्रियों की सुविधा के नाम पर घोषित प्रोत्साहन योजना अब कर्मचारियों के लिए दबाव का कारण बनती दिख रही है। एक ओर 3600 से 4500 रुपये तक की अतिरिक्त राशि का वादा है, तो दूसरी ओर माइलेज, आय और सीट भरने के लक्ष्य पूरे न होने पर वेतन कटौती का डर।

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