जापान के कोडो ग्रुप का वर्ल्ड टूर:ड्रम मास्टर्स बनने के लिए 2 साल बिना फोन-इंटरनेट के रहना पड़ता है, खुद बनाते हैं अपना खाना, चावल की बोरियां लेकर पेरिस पहुंचे

Actionpunjab
2 Min Read




फ्रांस की राजधानी पेरिस के मशहूर ‘साले प्लेयेल हॉल’ के बाहर हाल ही में एक बस रुकी। बस से उतरे 14 लोग आम टूरिस्ट नहीं थे, ये जापान के दुनिया भर में मशहूर ‘कोडो’ ग्रुप के कलाकार थे। यह ग्रुप दुनिया का सबसे प्रसिद्ध ‘ताइको’ यानी पारंपरिक जापानी ड्रम बजाने वाला संगीत समूह है, जो इन दिनों वर्ल्ड टूर पर है। खास बात यह कि बड़े स्टार होने के बावजूद ये अपना सारा सामान, यहां तक कि भारी ड्रम भी खुद उठाते हैं। इनके साथ जापान से खास चावल की बोरियां भी आईं, क्योंकि ये खाना खुद बनाते हैं और जापानी चावल ही खाते हैं। प्रशिक्षण में ड्रम के साथ ही बांसुरी, नाच और संगीत भी सिखाते हैं कोडो का हिस्सा बनना आसान नहीं है। चयन के बाद नए प्रशिक्षुओं को जापान के पश्चिमी तट के ‘साडो द्वीप’ के ट्रेनिंग सेंटर में भेजा जाता है। यह वही द्वीप है, जिसे कभी निर्वासन की जगह माना जाता था। यहां 2 साल तक फोन, इंटरनेट या टीवी जैसी किसी भी टेक्नोलॉजी की अनुमति नहीं होती। दिन की शुरुआत सुबह 5:30 बजे लंबी दौड़ से होती है। रात तक अभ्यास, भोजन और फिर अभ्यास चलता रहता है। ट्रेनिंग में कलाकार सिर्फ ड्रम बजाना नहीं सीखते। वे खेती करके चावल खुद उगाते हैं। देवदार की लकड़ी तराशकर ड्रमस्टिक्स भी खुद बनाते हैं। साथ ही बांसुरी, नृत्य और धातु के वाद्य यंत्रों की दूसरी कलाएं भी सीखते हैं। पहले साल में ही आधे से ज्यादा छोड़ देते हैं ट्रेनिंग इतनी सख्त है कि पहले साल के अंत तक आधे से ज्यादा छात्र बीच में ही हार मानकर घर लौट जाते हैं। दूसरे साल के अंत में भी चयन तय नहीं होता। कभी सिर्फ 1-2 को जूनियर मेंबर चुना जाता है, तो कभी किसी को भी नहीं। जूनियर मेंबर बनने के बाद भी एक साल खुद को साबित करने पर ही कोई स्थाई सदस्य बन पाता है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *