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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मनरेगा श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत कार्यरत मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित वेतन ही मिलेगा। यह फैसला संदीप सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर आया, जिसमें मनरेगा योजना के तहत काम करने वाले कृषि श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि इन श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने न्यायालय को सूचित किया कि कृषि मजदूरों के लिए प्रतिदिन 252 रुपये की न्यूनतम मजदूरी निर्धारित है। सरकार ने यह भी बताया कि प्रदेश में मनरेगा श्रमिकों के लिए भी यही मजदूरी दर लागू की गई है। राज्य सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद, न्यायालय ने अपनी टिप्पणी करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने पारित किया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला:मनरेगा श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत ही मिलेगा वेतन
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