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हाथरस भगदड़ मामले में आज गुरुवार को न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान महिला उप निरीक्षक सुषमा देवी की गवाही पूरी की गई। यह मामला 2 जुलाई 2024 को सिकंद्राराऊ क्षेत्र में एक सत्संग के बाद हुई भगदड़ से संबंधित है, जिसमें 121 लोगों की मौत हो गई थी। उप निरीक्षक सुषमा देवी वर्तमान में शाहजहांपुर के महिला थाने में तैनात हैं। घटना के समय वह हाथरस के महिला थाने में कार्यरत थीं और उनकी ड्यूटी घटनास्थल पर लगी हुई थी। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने बताया कि सुषमा देवी ने अपनी गवाही में कहा कि वह मंच के सामने बनी रंगोली से लोगों को फूल उठाने से मना कर रही थीं। इसी दौरान वह भीड़ में फंस गईं और भगदड़ के रेले में हाईवे के उस पार चली गईं। सुषमा देवी ने बताया कि वह एक गड्ढे में गिर गईं और उनके ऊपर कई लोग गिर गए, जिससे वह दब गईं। उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह बेहोश हो गईं। होश आने पर उन्हें पहले एक टेंपो से क्वार्टर भेजा गया, जिसके बाद उनके घरवालों ने उन्हें सरकारी अस्पताल पहुंचाया। अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर से उनकी जिरह भी पूरी हो गई। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है। सभी आरोपियों की हो चुकी है जमानत… यह घटना 2 जुलाई 2024 को सिकंद्राराऊ क्षेत्र के फुलरई मुगलगढ़ी गांव में ‘भोले बाबा’ के सत्संग के समापन के बाद हुई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई थी और 150 से अधिक श्रद्धालु घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ लगभग 3200 पेज का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया है, जिसमें 676 गवाहों के बयान शामिल हैं। सभी आरोपियों पर आरोप तय हो चुके हैं और उन्हें जमानत भी मिल चुकी है। आरोपियों में देव प्रकाश मधुकर, मेघ सिंह, मुकेश कुमार, मंजू देवी, मंजू यादव, राम लड़ेते, उपेंद्र सिंह, संजू कुमार, रामप्रकाश शाक्य, दुर्वेश कुमार और दलवीर सिंह शामिल हैं।
हाथरस भगदड़ मामले में महिला दरोगा की गवाही:भीड़ में फंसकर हाईवे के दूसरी तरफ पहुंचीं, खुद भी घायल हुई थीं महिला SI
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