बच्चे एआई से पूछ रहे हर जवाब, खुद की सोचने की क्षमता घटी

Actionpunjab
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शहर में बच्चों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई एप का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल अब पैरेंट्स के लिए चिंता का विषय बन गया है। स्कूल के सवाल हों, प्रोजेक्ट बनाना हो या किसी विषय को समझना हो, बच्चे अब खुद सोचने की बजाय तुरंत एआई एप खोलकर जवाब ढूंढने लगे हैं। विशेषज्ञों के पास ऐसे कई पैरेंट्स पहुंच रहे हैं जो बता रहे हैं कि बच्चों में हर सवाल का तुरंत डिजिटल जवाब पाने की आदत बनती जा रही है। इससे बच्चों की सोचने, समझने और खुद से समाधान निकालने की क्षमता पर असर पड़ रहा है। कई घरों में पैरेंट्स भी जब किसी सवाल का जवाब नहीं जानते तो बच्चों के सामने ही एआई एप्स का सहारा ले लेते हैं। इससे बच्चों को यह संदेश मिल रहा है कि हर समस्या का हल फोन से लिया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पहले बच्चे किसी सवाल का जवाब पाने के लिए किताबें देखते थे, टीचर्स से पूछते थे या खुद सोचकर हल निकालने की कोशिश करते थे। इससे उनकी जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और विश्लेषण क्षमता विकसित होती थी। केस 1 : होमवर्क से पहले एआई एप खोलना आदत बन गई एक स्कूल में पढ़ने वाले आठवीं क्लास के छात्र की आदत बन गई थी कि जैसे ही होमवर्क मिलता, वह सीधे एआई एप खोलकर पूरा उत्तर कॉपी कर लेता। शुरुआत में पैरेंट्स को लगा कि बच्चा पढ़ाई में रुचि ले रहा है, लेकिन जब टेस्ट में उससे वही सवाल पूछे गए तो वह जवाब नहीं दे पाया। तब पता चला कि बच्चा समझने की बजाय केवल एप से जवाब लेकर लिख रहा था। टीचर्स ने भी पैरेंट्स को अलर्ट किया कि बच्चे को पहले खुद सोचने के लिए प्रेरित करें। केस 2 : पैरेंट्स का व्यवहार भी बन रहा उदाहरण : एक परिवार में जब बच्चा पढ़ाई के दौरान सवाल पूछता है और पैरेंट्स को जवाब नहीं पता होता, तो वे तुरंत एआई एप खोलकर उत्तर दिखा देते हैं। धीरे-धीरे बच्चे ने भी यही तरीका अपना लिया। अब वह किसी भी विषय को समझने की बजाय सीधे एप से उत्तर निकाल लेता है। पैरेंट्स को एहसास हुआ कि उनकी ही आदत बच्चे के व्यवहार को प्रभावित कर रही थी। केस 3 : प्रोजेक्ट और असाइनमेंट भी एप से तैयार : एक टीचर ने बताया कि अब बच्चों के प्रोजेक्ट और असाइनमेंट में भी एआई का असर साफ दिखाई देने लगा है। कई बार बच्चे ऐसे शब्द और जवाब लिख देते हैं जो उनकी उम्र के हिसाब से असामान्य लगते हैं। जांच करने पर पता चलता है कि पूरा कंटेंट एआई से लिया गया है। इससे बच्चों की खुद से रिसर्च करने और सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ज्यादा निर्भरता चिंता का कारण

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