13 घंटे पहले
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सूर्य कुंभ से मीन राशि में 14-15 मार्च की मध्य रात्रि में प्रवेश करेगा। इस वजह मीन संक्रांति की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं। कुछ पंचांग में 14 मार्च को और कुछ पंचांग में 15 मार्च को मीन संक्रांति मनाने की सलाह दी गई है। सूर्य एक साल में सभी 12 राशियों का चक्कर पूरा करता है, इसलिए साल में कुल 12 संक्रांतियां मनाई जाती है। इस पर्व पर सूर्य पूजा के साथ नदी स्नान और दान-पुण्य करने की परंपरा है।
- मीन संक्रांति से शुरू होगा खरमास
सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ खरमास की शुरुआत हो जाएगी। यह महीना 14 अप्रैल सुबह करीब 9:30 बजे तक रहेगा। खरमास में विवाह, यज्ञोपवित, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं।
- मीन संक्रांति पर करें ये शुभ काम
मीन संक्रांति पर सुबह जल्दी जागना चाहिए और स्नान के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य चढ़ाना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें। जल में कुमकुम, चावल, लाल फूल डालें और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं। सूर्य पूजा के बाद घर के आसपास जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं। ये संभव न हो, तो अनाज, धन, जूते-चप्पल, कपड़े दान करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री दान कर सकते हैं।
- खरमास से जुड़ी मान्यता
पौराणिक मान्यता है कि सूर्यदेव खरमास के दिनों में अपने गुरु यानी बृहस्पति की सेवा करते हैं। एक साल में दो बार खरमास आता है। एक तब जब सूर्य धनु राशि में रहता है और दूसरा तब जब सूर्य मीन राशि में रहता है। इन दोनों ही राशियों के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। माना जाता है कि सूर्य खरमास के दिनों में बृहस्पति के घर वास करते हैं। सूर्य पंचदेवों में शामिल हैं। विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कामों की शुरुआत पंचदेवों की पूजा के साथ ही होती है, लेकिन खरमास के दिनों में सूर्य गुरु की सेवा में लगे रहते हैं और वे किसी अन्य शुभ काम में उपस्थित नहीं होते हैं। इस मान्यता की वजह से खरमास में शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं।
- तीनों ग्रहों की बनेगी युति
सूर्य के मीन राशि में आने से तीन ग्रहों की युति बन जाएगी। मीन राशि में शुक्र-शनि मौजूद हैं और अब सूर्य भी आ जाएगा। सूर्य और शनि पिता-पुत्र हैं, लेकिन इनके बीच शत्रुता रिश्ता माना जाता है, इस कारण कुछ लोगों के रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है। शुक्र की वजह से पुराने मित्रों से मुलाकात हो सकती है। शनि काम में स्थिरता देगा, लेकिन अनुशासन बनाए रखना होगा। सूर्य नेतृत्व से जुड़े कामों में लाभ दे सकता है।
- खरमास में मनेगी चैत्र नवरात्रि
इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक रहेगी। इस दौरान भी खरमास रहेगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक देवी मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री ये देवी दुर्गा के नौ स्वरूप माने गए हैं।
