11 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

आज (3 मई) हिन्दी पंचांग के तीसरे महीने ज्येष्ठ का दूसरा दिन है। इस साल ज्येष्ठ मास में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) रहेगा। अधिक मास की वजह से ज्येष्ठ 2 मई से 29 जून तक यानी 59 दिनों का रहेगा।
2 से 16 मई तक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष रहेगा, इसके बाद 17 मई से अधिकमास मास की शुरू होगा, जो कि 15 जून तक चलेगा। इसके बाद ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा, जो कि 29 जून तक रहेगा। अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ज्येष्ठ महीने में भगवान विष्णु के साथ ही सूर्य देव और हनुमान जी की विशेष पूजा करने की परंपरा है। दिन की शुरुआत सूर्य को जल चढ़ाकर करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। जानिए ज्येष्ठ मास से जुड़ी खास बातें…
- इस महीने में गर्मी अधिक रहती है। इस वजह से अधिकतर नदी, तालाब, कुएं इन दिनों में सूख जाते हैं। कई जगहों पर जल की कमी हो जाती है। इस वजह से खासतौर पर ज्येष्ठ मास में जल बचाने की परंपरा है। ये महीना जल का महत्व बताता है। इसी महीने में सबसे बड़ी निर्जला एकादशी (25 जून) का व्रत भी किया जाता है। इस एकादशी में पूरे दिन निर्जल रहकर व्रत करते हैं। भक्त अन्न के साथ ही पूरे दिन पानी का भी त्याग करते हैं। गर्मी में पूरे दिन अन्न-जल के बिना रहना एक तप है। इसी वजह से इस एकादशी व्रत का महत्व काफी अधिक है।
- ज्येष्ठ मास और अधिक मास विष्णु जी के प्रिय माह माने गए हैं। इस बार ज्येष्ठ मास में ही अधिक मास भी है, इसलिए इस महीने में भगवान विष्णु और इनके अवतारों की विशेष पूजा करें। मथुरा, अयोध्या जैसे तीर्थों की यात्रा करें। भागवत कथा पढ़ें-सुनें। पूजा-पाठ के साथ ही जल का दान जरूर करना चाहिए और पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा में स्नान भी करना चाहिए।
- ज्येष्ठ मास में रोज सुबह सूर्योदय से पहले जागना चाहिए। स्नान के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं। अर्घ्य चढ़ाने के बाद तुलसी को भी जल चढ़ाएं।
- सूर्य को जल चढ़ाने के बाद घर के मंदिर में पूजा करें और पूजा में अपने इष्टदेव के मंत्रों का जप करें। जैसे शिव जी के लिए ऊँ नम: शिवाय, विष्णु जी के लिए ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, श्रीकृष्ण के लिए कृं कृष्णाय नम:, श्रीराम के लिए रां रामाय नम:, हनुमान जी के लिए श्री रामदूताय नम:, देवी मां के लिए दुं दुर्गायै नमः मंत्र का जप कर सकते हैं।
- ज्येष्ठ मास यानी गर्मी के दिनों में भगवान शिव का ठंडे जल से अभिषेक करना चाहिए। शिवलिंग पर चंदन का लेप करें। बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। भोग लगाएं। आरती करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए।
- मंत्र जप के बाद घर के मंदिर में ध्यान करना चाहिए। दोनों आंखें बंद करके अपना ध्यान दोनों भौंहों के बीच आज्ञा चक्र पर लगाएं। सांस लेने और छोड़ने की गति सामान्य रखें। आप चाहें तो ध्यान करते समय मंत्र जप भी कर सकते हैं। ध्यान करने से मन शांत होता है।
- ज्येष्ठ मास में दान-पुण्य जरूर करना चाहिए। इस महीने में जल का दान करने का महत्व काफी अधिक है। किसी मंदिर में या किसी अन्य सार्वजनिक जगह पर प्याऊ लगा सकते हैं, यह संभव न हो, तो किसी प्याऊ में मटके का या धन का दान कर सकते हैं।
- जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, जूते-चप्पल, कपड़े और छाते का दान करना चाहिए। किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं।
- इस महीने में पशु-पक्षियों के खाने-पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। गर्मी की वजह से पशु-पक्षियों को खाना-पानी आसानी से नहीं मिल पाता है। ऐसे में हमें अपने घर के आसपास पशु-पक्षियों के लिए जल और खाना रखना चाहिए। घर के आसपास पेड़-पौधों को पानी जरूर डालें।
- ज्येष्ठ मास में तीर्थ यात्रा करने की भी परंपरा है। इन दिनों में उत्तराखंड के चार धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री की यात्रा कर सकते हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश जा सकते हैं। गर्मी के दिनों में की गई तीर्थ यात्रा सकारात्मकता बढ़ाती है, मन प्रसन्न होता है।
