DST हेड कांस्टेबल सस्पेंड, थानेदार को सीकर भेजा:भिवाड़ी के खुशखेड़ा में अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से 9 लोग जिंदा जल गए थे

Actionpunjab
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भिवाड़ी के अवैध पटाखा फैक्ट्री मामले में पुलिस DST के हेड कांस्टेबल योगेश शर्मा को आईजी राहुल प्रकाश ने सस्पेंड कर दिया है। टपूकड़ा के थानेदार व DST इंचार्ज मुकेश वर्मा को सीकर पुलिस लाइन लगाया है। हादसे के 28 दिनों बाद यह कार्रवाई की है। अवैध पटाखा फैक्ट्री में 16 फवरी को सुबह 9 बजकर 10 मिनट के आसपास 10 सैकंड में 3 तेज धमाकों हुई थे। इसमें 9 लोग जिंदा जलकर राख में तब्दील हो गए थे। अवैध पटाखा फैक्ट्री मामले में DST के थानेदार मुकेश वर्मा व हेड कांस्टेबल योगेश शर्मा की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। क्योंकि अवैध पटाखा फैक्ट्री हेड कांस्टेबल योगेश शर्मा के भाई हेमंत शर्मा के नाम संचालित थी और योगेश शर्मा भिवाड़ी में थानेदार मुकेश वर्मा के साथ एक अन्य आरोपी हेमंत सचदेवा के फ्लैट पर कई साल से रह रहे थे। दोनों का ट्रांसफर जयपुर होने के बावजूद बीच-बीच में फ्लैट पर आते रहे हैं। घटना 16 फरवरी को हुई, पुलिस ने दो आरोपी तुरंत पकड़े घटना 16 फरवरी को सुबह 9 बजे के आसपास होती है और पुलिस ने उसी दिन डीएसटी हेड कांस्टेबल के भाई हेमंत शर्मा व मैनेजर अभिनंद को पकड़ लिया था। क्योंकि ब्लास्ट वाली फैक्ट्री का संचालन हेमंत शर्मा कर रहा था। उसके नाम फैक्ट्री का एग्रीमेंट था। उस फैक्ट्री में काम करने वाले अभिनंदन को भी अरेस्ट कर लिया था। उसके कई दिनों के बाद तीसरे आरोपी दिल्ली के हेमंत सचदेवा को अरेस्ट किया गया। करीब 2 सप्ताह बाद भी पुलिस ने दोषियों के चेहरे सामने नहीं रखे। आखिरी में IG ने पुलिस की भूमिका की जांच का जिम्मा विजिलेंस को सौंप दिया था। उसके बाद अब विजिलेंस की जांच पूरी हुई। तब टपूकड़ा के थाना प्रभारी व DST इंचार्ज मुकेश वर्मा को सीकर लाइन में भेजा है। वहीं हेड कांस्टेबल योगेश शर्मा को सस्पेंड किया गया है। 9 जान बच सकती थी अगर… दिवाली से कुछ दिन पहले 24 अक्टूबर 2024 को SDM टूपकड़ा ने भिवाड़ी के चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र में 2 अवैध पटाखा फैक्ट्रियों को सीज किया था। जिसमें करीब 40 लोग मौके पर काम करते मिले थे। जो कि इन्हीं अभियुक्त (डीएसी हेड कांस्टेबल के भाई हेमंत शर्मा, अभिनंदन तिवारी व हेमंत सचदेवा) द्वारा संचालित थी। इनके अलावा मदन उर्फ अब्दुल्ला की भी संलिप्तता थी। जो कि हेड कांस्टेबल व थानेदार का करीबी रहा है। यदि उस सयम सीज करने के तुरंत बाद SDM ने मुकदमा दर्ज कराया होता तो और इन आरोपियों को गिरफ्त में लिया जाता तो नए अवैध पटाखों के कारखाने खड़े नहीं होते। ये 9 बिहारी मजदूर बच सकते थे। 2024 से अब तक कहां-कहां खामियां रही या फिर मिलीभगत 24 अक्टूबर 2024 को पकड़ी गई फैक्ट्रियों में एक फैक्ट्री में 7 दिन बाद पीछे की दीवार तोड़कर पूरे पटाखे व कच्चा माल पार कर लिया गया। बाकी बचे हुए में आग लगा दी। ताकि सबूत नहीं बच सकें। इसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन में मुकदमा दर्ज ( एफआईआर नंबर 274/24) कराया। यह बड़ी चूक रही। बाकी अधिकतर जानकर इसे पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत मानते हैं। यही नहीं उसी समय दूसरी सीज की गई फैक्ट्री का अता-पता नहीं है। पूरा माल ही गायब कर दिया गया। न कोई मुकदमा हुआ न जांच हुई। ये फैक्ट्री चलाने वाले गिरोह भी यही था। जिनके नाम अब सामने आए हैं। 2024 में आग लगने के मुकदमें की जांच संदेह के घेरे में 2024 में आग लगने के मुकदमें की जांच इसलिए संदेह के घेरे में है कि पुलिस जांच को करीब सवा साल दबाए बैठी रही। दिसंबर 2025 में इस मुकदमें में एफआर लगा दी जाती है। सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि 10 दिन बाद कोर्ट में भी प्रशासन स्वीकार कर लेता है कि इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं चाहते हैं। 2024 में सवा साल में जांच करने वाले 2024 का जब मुकदमा हुआ तब चौपनकी थाना प्रभारी नाथूलाल मीणा थे। जो एक साल तक मुकदमें को दबाए बैठे रहे। इसके बाद नए थाना प्रभारी सतीश आ गए। जो एक महीने तक रहे। लेकिन बीमार होने के कारण छुट्‌टी पर ज्यादा रहे। उनके बाद विक्रम सिंह थाना प्रभारी आते है। ज्वाइनिंग करने के केवल 4 दिन बाद ही मुकदमें में एफआर लग देते हैं। सीओ चौपानकी कैलाश चौधरी ने एफआर लगाने के आदेश दिए थे। अवैध पटाखा फैक्ट्री चलाने का मास्टरमाइंट 10वीं फेल बस कंडेक्टर अवैध पटाखा फैक्ट्रियां चलाने का मास्टर माइंड 10वीं फेल बस कंडेक्टर दिल्ली निवासी हेमंत सचदेवा है। दिखाने के तौर पर प्रॉपर्टी का काम करता था। लेकिन असली काम अवैध पटाखा फैक्ट्री चलाने का था। जिसके मकान थानेदार व हेड कांस्टेबल रहते थे। इनके अलावा भी पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी भी आते थे।
जहां 7 मौतें,वो फैक्ट्री पुलिसवाले का भाई चला रहा था:मालिक की पत्नी के फ्लैट में रहते थे थानेदार-हेड कॉन्स्टेबल; कभी विस्फोटक जब्त नहीं किया

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