13 घंटे पहले
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आज (15 मार्च) चैत्र महीने के कृष्ण की एकादशी यानी पापमोचिनी एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भक्त को पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसी मान्यता है। एक अन्य मान्यता के मुताबिक जो व्यक्ति पापमोचिनी एकादशी का व्रत करता है, उसे गाय दान करने के बराबर पुण्य मिलता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पापमोचिनी एकादशी व्रत करने वाले भक्त को पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इस तरह स्नान करने से व्यक्ति को तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिलता है और उसके जाने-अनजाने में हुए पाप कर्मों के फल खत्म होते हैं। स्नान के बाद उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
एकादशी पर इन चीजों का करें दान
इस व्रत में दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। पापमोचिनी एकादशी पर तिल, कपड़े, नमक, गुड़ और घी का दान करना चाहिए। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना चाहिए। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करना चाहिए। पक्षियों के लिए अनाज और पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। किसी तालाब में मछलियों को आटे की गोलियां खिलानी चाहिए।
ऐसे कर सकते हैं व्रत-पूजा
- एकादशी पूजा की शुरुआत में सबसे पहले भगवान गणपति की पूजा करें। इसके बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा शुरू करें। दीपक जलाएं। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी का गंगाजल से अभिषेक करें। फिर पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- इसके बाद विष्णु जी को वस्त्र, आभूषण और जनेऊ अर्पित करें, देवी को लाल चुनरी, हार-फूल चढ़ाएं। फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएं। मिठाई का भोग लगाएं। कर्पूर जलाकर भगवान की आरती करें।
- पापमोचिनी एकादशी पर खासतौर पर भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा करेंगे, तो बहुत शुभ रहेगा। मान्यता है कि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। इसलिए भोग में तुलसी का होना आवश्यक है। ऐसा कहा जाता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते।
- एकादशी की शाम तुलसी के पास दीपक जलाना चाहिए। तुलसी की पूजा करनी चाहिए, लेकिन ध्यान रखें शाम को तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए। दूर से ही पूजा करनी चाहिए। पापमोचिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के नामों का स्मरण करना चाहिए आप चाहें, तो विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं।
- इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को अपनी वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए। किसी से झगड़ा न करें। कटु वचन बोलने से बचें। भगवान विष्णु महालक्ष्मी की पूजा के साथ ग्रंथों का पाठ करें। भगवान की कथाएं पढ़ें-सुनें, प्रवचन सुनें।
- व्रत करने वाले व्यक्ति को दिनभर निराहार रहना चाहिए। जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, वे फलों का और दूध का सेवन कर सकते हैं। अगले दिन द्वादशी तिथि पर सुबह विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं, इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह एकादशी व्रत पूरा होता है।
