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नई दिल्ली29 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि महिला अफसरों को अब पूरा पेंशन लाभ मिलेगा- फाइल फोटो
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अफसरों को पूरी पेंशन देने का आदेश दिया। जिन मामलों में महिला अफसर परमानेंट कमीशन (PC) नहीं मिलने के कारण पहले ही सेवा छोड़ चुकी थीं, उन्हें एकमुश्त राहत देते हुए 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन और अन्य लाभ देने का फैसला सुनाया।
कोर्ट ने कहा- सशस्त्र बलों के भीतर मौजूद सिस्टमिक भेदभाद के कारण महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन से वंचित किया गया। महिलाओं को परमानेंट कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था।
पूरा मामला SSC के तहत नियुक्त महिला अफसरों की याचिकाओं से जुड़ा था, जिन्होंने PC देने की मांग की थी। SSC के तहत नियुक्त अफसर का कार्यकाल 10 साल का होता है, जिसे 4 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद योग्यता के आधार पर परमानेंट कमीशन दिया जाता है।
परमानेंट कमीशन नहीं मिलने पर उन्हें सेवा छोड़नी होती है। इसके खिलाफ महिला अफसरों ने पहले आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (AFT) का रुख किया था और PC से वंचित किए जाने को चुनौती दी थी। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कई याचिकाओं को एक साथ सुना।

महिला अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से 3 राहत…
- जिन SSC अफसरों को 2020–21 में नंबर 5 सेलेक्शन बोर्ड या AFT (ट्रिब्यूनल) के फैसले के आधार पर पहले ही स्थायी कमीशन (PC) मिल चुका है, उनका स्टेटस नहीं बदला जाएगा।
- जो महिला SSC अफसर (अपीलकर्ता) इस केस के दौरान सेवा से बाहर हो गईं, उन्हें मान लिया जाएगा कि उन्होंने 20 साल की जरूरी सेवा पूरी कर ली है। उन्हें पेंशन और उससे जुड़े सभी लाभ मिलेंगे, लेकिन पिछला वेतन (एरियर) नहीं मिलेगा।
- वर्तमान में जो महिला अफसर सेवा में हैं, उन्हें 60% कटऑफ पूरा करने पर परमानेंट कमीशन मिलेगा। बशर्ते उन्हें जरूरी मंजूरी मिली हो।
यह आदेश उन महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा जो JAG (जज एडवोकेट जनरल) और AEC (एजुकेशन कॉर्प्स) में हैं, क्योंकि उन्हें 2010 से ही स्थायी कमीशन के लिए विचार का मौका मिलता रहा है।
सीजेआई नेआर्मी, नेवी और एयर फोर्स के लिए कहा
आर्मी: क्या ACR यानी परफॉर्मेंस रिपोर्ट सही तरीके से बनी? हमने पाया है कि ACR इस सोच के साथ लिखे गए कि महिलाओं को आगे मौका नहीं मिलेगा। इससे महिला अफसरों की मेरिट पर असर पड़ा, पुरुष अधिकारियों से पीछे रहीं। महिलाओं को जरूरी ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। यह उनके करियर के खिलाफ गया। आर्टिकल 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ के लिए आदेश दे रहे हैं।
नेवी: ACR में यहां भी पूर्वाग्रह मिला। लेकिन ‘डायनेमिक वैकेंसी मॉडल’ सही और गैर-भेदभावपूर्ण है। अधिकारियों को मूल्यांकन का पूरा मापदंड नहीं बताया गया, यह बड़ी कमी।
एयर फोर्स: न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड जल्दबाजी में लागू किए गए। 2007 बैच को 2020-21 में आंका गया, यह प्रक्रिया ठीक नहीं। प्रक्रिया में खामियां होने के बावजूद कोर्ट ने पुनर्नियुक्ति का आदेश दिया।
कोर्ट के फैसले पर किसने क्या कहा…
सीनियर एडवोकेट वी. मोहना ने कहा कि सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने का मामले में यह बड़ा कदम है। सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कहा इस फैसले के लिए कोर्ट का धन्यवाद है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले पर हम भी आभारी हैं।
दिसंबर 2025 में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था…

23 साल पहले कोर्ट पहुंचा था यह मामला
23 साल पहले 2003 में इस मामले में महिला वकील बबीता पुनिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनके बाद 9 महिला अफसरों ने 2009 तक हाईकोर्ट में इसी मुद्दे पर अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया और महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन देने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने कहा था कि यह साफ किया जाता है कि जो महिला अफसर रिटायरमेंट की उम्र तक नहीं पहुंचीं हैं, उन सभी को स्थाई कमीशन दिया जाए। साथ ही उन्हें प्रमोशन जैसे लाभ भी दिए जाएं। हम महिलाओं पर कोई एहसान नहीं कर रहे, हम उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार दिला रहे हैं। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
केंद्र ने नीति बनाई, लेकिन मार्च 2019 का क्लॉज जोड़ दिया
हाईकोर्ट के फैसले के 9 साल बाद सरकार ने फरवरी 2019 में सेना के 10 विभागों में महिला अफसरों को स्थाई कमीशन देने की नीति बनाई, लेकिन यह कह दिया कि मार्च 2019 के बाद से सर्विस में आने वाली महिला अफसरों को ही इसका फायदा मिलेगा।
इस तरह वे महिलाएं स्थाई कमीशन पाने से वंचित रह गईं, जिन्होंने इस मसले पर लंबे अरसे तक कानूनी लड़ाई लड़ी। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दलील दी थी कि पुरुष सैनिक महिला अफसरों से आदेश लेने को तैयार नहीं होंगे।

सेनाओं में महिला अफसरों की अभी क्या स्थिति है
1. थलसेना : महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के दौरान आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डनेंस, एजुकेशन कोर, जज एडवोकेट जनरल, इंजीनियर, सिग्नल, इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक-मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में ही एंट्री पा सकती हैं। उन्हें कॉम्बैट सर्विसेस जैसे- इन्फैंट्री, आर्मर्ड, तोपखाने और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में काम करने का मौका नहीं दिया जाता। हालांकि, मेडिकल कोर और नर्सिंग सर्विसेस में ये नियम लागू नहीं होते। इनमें महिलाओं को परमानेंट कमीशन मिलता है। वे लेफ्टिनेंट जनरल पद तक भी पहुंची हैं।
2. वायुसेना और नौसेना : यहां महिला अफसरों को स्थाई कमीशन का विकल्प है। वायुसेना में महिलाएं कॉम्बैट रोल, जैसे- फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी में शामिल हो सकती हैं। शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत महिलाएं वायुसेना में ही हेलिकॉप्टर से लेकर फाइटर जेट तक उड़ा सकती हैं। नौसेना में भी महिलाएं लॉजिस्टिक्स, कानून, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, पायलट और नेवल इंस्पेक्टर कैडर में सेवाएं दे सकती हैं।

