अयोध्या में रामनवमी पर शुक्रवार दोपहर 12 बजे से रामलला का सूर्य तिलक हुआ। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रामलला का यह दूसरा सूर्य तिलक है। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का सूर्य तिलक किया गया। 9 मिनट तक भगवान के ललाट पर नीली किरणें पड़ीं।
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सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का जन्म हो गया। इस दौरान 14 पुजारी गर्भगृह में मौजूद रहे। विशेष पूजा की। इसके बाद आरती हुई। सूर्य तिलक के बाद कुछ देर के लिए रामलला का पट बंद कर दिए गए। अब रामलला को 56 तरह के व्यंजन का भोग लगेगा।
सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइप से 65 फीट लंबा सिस्टम बनाया गया। इसमें 4 लेंस और 4 मिरर के जरिए गर्भ गृह तक रामलला के मस्तक पर किरणें पहुंचाई गईं।
इससे पहले, गर्भगृह को फूलों से सजाया गया। सुबह 5.30 बजे रामलला की आरती की गई। भगवान को पीतांबर पहनाए गए। आम दिनों के मुकाबले भक्त 3 घंटे ज्यादा रामलला के दर्शन कर पाएंगे। सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक यानी 18 घंटे दर्शन होंगे। पहले सुबह 6:30 से रात 9:30 तक दर्शन होते थे।
आज करीब 10 लाख लोग रामलला के दर्शन करने पहुंचे हैं। राम जन्मभूमि परिसर में लंबी लाइनें लगी हैं। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर काफी भीड़ है।

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आज की तस्वीरें-

रामलला के सूर्य तिलक के दौरान प्रभू के ललाट पर 9 मिनट तक नीली किरणें पड़ीं।

अयोध्या में राम नवमी पर राम मंदिर में सुबह की आरती की गई।

राम मंदिर में रामलला का पंचामृत अभिषेक किया गया।

सूर्य तिलक से पहले रामलला की विशेष पूजा-अर्चना की गई।

राम नवमी पर राम मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी है।
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