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फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वेंटिलेटर के अभाव में एक मरीज की मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान संजय नगर बस्ती निवासी पंजाब पुलिस के सेवानिवृत्त एएसआई सुखविंदर सिंह के रूप में हुई है। इस मामले में मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर सवाल खड़े करते हुए इंसाफ की मांग की है। जानकारी के अनुसार, सुखविंदर सिंह को एक दिन पहले 27 मार्च शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे तबीयत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत बेहद गंभीर थी और उन्हें तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत थी लेकिन अस्पताल में उस समय कोई वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते परिजनों को इंतजार करने के लिए कहा गया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल परिजनों के अनुसार करीब 11 घंटे तक वेंटिलेटर का इंतजार करने के बाद शाम 7 बजे सुखविंदर सिंह की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और राज्य सरकार व जिला प्रशासन से इंसाफ की मांग की है। इस मामले में मृतक के चचेरे भाई और पूर्व पार्षद कश्मीर सिंह ने कहा कि भले ही वेंटिलेटर मिलने से भी जान बचने की गारंटी नहीं थी। लेकिन उन्हें इस बात का जीवनभर मलाल रहेगा कि समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण उन्होंने अपना भाई खो दिया है। सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यहां पर कई जिलों से मरीज आते हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी से परेशानी झेलते है। वेंटिलेटर न होने की परिजनों को दे थी जानकारी-एमएस इस मामले में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. नीतू कुक्कड़ ने बताया कि अस्पताल में करीब 100 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन जिस समय इस मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी, उस समय कोई खाली नहीं था। इस बारे में मरीज और उसके परिजनों को भी अवगत करा दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि मरीज लिवर डैमेज की बीमारी से पीड़ित था और परिजनों की सहमति से उसे मैन्युअल वेंटिलेटर के जरिए पंपिंग दी जा रही थी, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
फरीदकोट में वेंटिलेटर नहीं मिलने से मरीज की मौत:11 घंटे तक होता रहा इंतजार, परिजनों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
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