अडाणी डिफेंस ने इंडियान आर्मी को 2000 मशीन गन सौंपी है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सेना को 2,000 ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन (LMG) की पहली खेप सौंपी। यह 7.62 मिमी कैलिबर के हथियार ग्वालियर के स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में बनाए गए हैं।
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सरकार इन हथियारों का इस्तेमाल LAC और LoC पर सुरक्षा और मारक क्षमता बढ़ाने के लिए करेगी। ‘प्रहार’ LMG की मारक क्षमता 1,000 मीटर तक है, जिससे दुश्मनों को दूर से निशाना बनाया जा सकता है। मशीन गन 8 किलोग्राम की हैं, जिनकी लंबाई 1100 mm है। एक मिनट में 700 राउंड फायरिंग होगी।
शनिवार को ग्वालियर स्थित प्लांट में सेना को LMG सौंपने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें रक्षा मंत्रालय के डीजी ए. अंबरासु, कंपनी के CEO आशीष राजवंशी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने मशीन गन की पहली खेप लेकर जा रहे ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
गन मशीनों की 4 तस्वीरें देखिए…

ये तस्वीर PLR 9 MASADA की है। ग्वालियर के स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में में बनाया गया है।

ये तस्वीर मशीन गन अभय 9MM की है, जिसे अडाणी डिफेंस ने सौंपी है।

अडाणी डिफेंस ने सेना को पिस्तौलें भी सौंपी हैं।

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने पहली खेप को दिखाई हरी झंडी।
6 साल में पूरा हुआ प्रोजेक्ट, समय से पहले डिलीवरी
CEO आशीष राजवंशी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को बोली जमा करने से लेकर डिलीवरी तक पूरा करने में करीब 6 साल लगे। कंपनी ने निर्धारित समय से 11 महीने पहले पहली खेप सौंप दी है। पूरा ऑर्डर देने के लिए पहले 7 साल से ज्यादा का समय तय था, लेकिन कंपनी इसे अगले 3 साल के भीतर पूरा कर देगी।
40,000 मशीन गन का ऑर्डर
कंपनी के अनुसार, LMG का कुल ऑर्डर लगभग 40,000 यूनिट का है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ए. अंबरासु ने समय से पहले डिलीवरी की सराहना करते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने की क्षमता मौजूद है।

सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर जोर
अंबरासु ने कहा कि सरकार रक्षा उद्योग के साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने “गति” और “पैमाना” को रक्षा खरीद के दो अहम स्तंभ बताया। उन्होंने यह भी कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार और निजी कंपनियों को साथ मिलकर काम करना होगा।
प्लांट की क्षमता और तकनीक
ग्वालियर में बना यह केंद्र करीब 100 एकड़ में फैला है और इसका सालाना उत्पादन लगभग 1 लाख हथियारों का है। इसमें इस्तेमाल होने वाली 90% से ज्यादा सामग्री देश में ही तैयार की जाती है। यहां एक अंडरग्राउंड फायरिंग रेंज भी है, जहां अधिकारियों ने निशानेबाजी का अभ्यास किया।
कंपनी के अनुसार, इस केंद्र में हर साल लगभग 30 करोड़ छोटे कैलिबर के गोला-बारूद बनाने की क्षमता है। साथ ही बड़े और मध्यम कैलिबर के गोला-बारूद के उत्पादन की क्षमता बढ़ाने की योजना भी है।

अडाणी डिफेंस ने इंडियन आर्मी को मशीन गन सौंपी है। मशीन गनों की तस्वीर।
हर हथियार की सख्त जांच
कंपनी ने बताया कि हर हथियार को सेना में शामिल करने से पहले कई परीक्षणों से गुजरना पड़ता है। इसमें बैलिस्टिक टेस्ट, पर्यावरणीय जांच और अन्य तकनीकी मूल्यांकन शामिल हैं, ताकि हथियार पूरी तरह भरोसेमंद और विश्वसनीय हों।
भविष्य में CQB हथियार भी बनाए जाएंगे
भविष्य की योजना के तहत यह केंद्र क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) हथियार बनाने के लिए तैयार है। इससे देश में छोटे हथियारों के निर्माण की क्षमता और बढ़ेगी। कंपनी का लक्ष्य अप्रैल 2026 से हर महीने लगभग 1,000 LMG का उत्पादन शुरू करना है। पूरा ऑर्डर 3 साल से भी कम समय में पूरा कर दिया जाएगा।
‘मेक इन इंडिया’ से सस्ते और भरोसेमंद हथियार
कंपनी का कहना है कि इन हथियारों को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत तैयार किया गया है, जिससे ये वैश्विक बाजार के मुकाबले कम कीमत पर उपलब्ध होंगे और सेना व अर्धसैनिक बलों के लिए भरोसेमंद साबित होंगे।
आधुनिक तकनीक से लैस है प्लांट
इस प्लांट में बैरल निर्माण, बोल्ट कैरियर और रिसीवर बनाने के साथ CNC मशीनिंग, रोबोटिक्स, सरफेस ट्रीटमेंट, सटीक माप-तोल प्रयोगशाला और 25 मीटर की फायरिंग रेंज जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।