राजसमंद की महिलाओं को एम्ब्रॉयडरी से मिली नई पहचान:देश-विदेश तक पहुंचेंगे उत्पाद, कलेक्टर बोले-स्थानीय हुनर को दिलाएंगे बड़ा बाजार

Actionpunjab
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राजसमंद में एम्ब्रॉयडरी कला ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रही है। कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने इस कार्य से जुड़ी महिलाओं से मुलाकात कर उनके उत्पादों का अवलोकन किया और उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस कला को देश-विदेश तक पहचान दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। कलेक्टर ने सराहा महिलाओं का हुनर कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने एम्ब्रॉयडरी कार्य से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को देखा और उनके कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के नवाचारपूर्ण प्रयास ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। देलवाड़ा ब्लॉक बना एम्ब्रॉयडरी का केंद्र जिले के देलवाड़ा ब्लॉक में महिलाओं ने संगठित रूप से एम्ब्रॉयडरी कार्य को अपनाया है। यहां कुर्तियां, बेडशीट, टॉप, दुपट्टे, साड़ियां और शर्ट जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की मांग अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रही, बल्कि अन्य राज्यों में भी तेजी से बढ़ रही है। 30 महिलाओं का समूह कर रहा काम डीपीएम डॉ. सुमन अजमेरा ने बताया कि संयोगिनी उत्पादक समूह की करीब 30 महिलाएं इस कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं उद्यमी दुर्गा यादव के मार्गदर्शन में पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर बाजार की जरूरतों के अनुसार आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं। पारंपरिक कला में आधुनिकता का संगम एम्ब्रॉयडरी कार्य के तहत कुर्ते, साड़ी, टॉप, दुपट्टे और स्टॉल के साथ राजस्थानी शैली की गुदड़ी भी बनाई जा रही है। इन उत्पादों में मिरर वर्क, थ्रेड वर्क और पैच वर्क का बेहतरीन संयोजन देखने को मिलता है, जो ग्राहकों को खासा आकर्षित कर रहा है। महिलाओं के लिए बन रहा आत्मनिर्भरता का जरिया यह पहल न केवल महिलाओं को रोजगार दे रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान कर रही है। प्रशासन द्वारा ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देने से आने वाले समय में ग्रामीण हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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