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न्यूजीलैंड में कारोबार की आड़ में इंटरनेशनल ड्रग्स नेटवर्क चलाने वाला बलतेज सिंह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह का भतीजा है। बलतेज ऑकलैंड में रहते हुए वह भारत, दुबई और अमेरिका से ड्रग्स मंगवाता था। जांच में सामने आया कि वह मेथामफेटामाइन और एफेड्रीन जैसी ड्रग्स को नारियल पानी के डिब्बों, हनी बियर के कैनों और कॉम्बुचा की बोतलों में छिपाकर न्यूजीलैंड भेजता था। इस नेटवर्क की शुरुआत 2021 में हुई थी। अलग-अलग देशों से फ्लाइट और कंटेनरों के जरिए माल ऑकलैंड पहुंचाया जाता था। जनवरी 2023 में जब उसने हजारों डिब्बे अपनी किराए की यूनिट में मंगवाकर खोलना शुरू किया, तभी पुलिस ने छापा मार दिया। मौके से 700 किलो से ज्यादा मेथामफेटामाइन बरामद हुई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 2025 में न्यूजीलैंड के हाईकोर्ट ने उसे 22 साल की सजा सुनाई। उस समय उसने कोर्ट से अपनी पहचान छिपाने की याचिका लगा दी थी, यह कहते हुए कि नाम सामने आने से उसके परिवार को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने उसकी बात मानते हुए पुलिस, सरकार और मीडिया को उसका नाम उजागर न करने के निर्देश दिए थे। लेकिन उसकी पहचान भारत में पहले ही सार्वजनिक हो चुकी थी। न्यूजीलैंड में उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई थी। हालांकि अब खबर है कि उसने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है। इसके बाद उसकी पहचान सार्वजनिक कर दी गई है। जानिए कोर्ट में चली कार्रवाई में क्या- क्या हुआ.. नारियल पानी के डब्बों में ले जाता था नशीला पदार्थ बलतेज सिंह साउथ ऑकलैंड में एक बिजनेसमैन था। 2021 में उसने एक इंडस्ट्रियल यूनिट किराए पर ली और बड़ी मात्रा में ड्रग्स आयात करना शुरू किया। उसी साल अगस्त में मलेशियन एयरलाइंस की फ्लाइट से न्यू दिल्ली से 1440 डिब्बे नारियल पानी ऑक्लैण्ड पहुंचे। बाहर से डिब्बे सामान्य लग रहे थे, लेकिन कुछ में एफेड्रीन (मेथ बनाने की दवा) और घुला हुआ मेथ था। कुछ महीने बाद दुबई से एमिरेट्स फ्लाइट से फिर नारियल पानी के डिब्बे आए। ये भी न्यू दिल्ली से भेजे गए थे और उनमें भी एफेड्रीन और मेथ पाया गया। एक साल से ज्यादा समय बाद, अक्टूबर 2022 में टोरंटो से एक कंटेनर शिप तौरंगा पहुंची। उसमें 40 फीट का कंटेनर था, जिसमें 28,800 डिब्बे हनी बियर थे। दिसंबर में अमेरिका से एक और 40 फीट का कंटेनर आया, जिसमें 22,680 बोतलें कॉम्बुचा थीं। जनवरी 2023 की शुरुआत में सिंह ने दो ट्रकों से हजारों डिब्बे बीयर और कॉम्बुचा की बोतलें उठवाईं और अपनी किराए की यूनिट में पहुंचाईं। वहां उन्होंने और दूसरे व्यक्ति हिमतजीत ‘जिमी’ सिंह खालों ने पैकिंग खोलनी शुरू की। इसी यूनिट से मिला 700 किलो से ज्यादा मेथामफेटामाइन पुलिस को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने इस यूनिट पर रेड की और वहां से लिक्विड और क्रिस्टलाइज्ड रूप में 700 किलोग्राम से ज्यादा मेथामफेटामाइन मिला। पुलिस ने बलतेज सिंह को भी गिरफ्तार किया। सिंथेटिक नशा है मेथामफेटामाइन मेथामफेटामाइन एकसिंथेटिक नशा है। इसका इस्तेमाल करने से लत लग जाती है। इसे क्रिस्टल मेथ, आइस या स्पीड कहा जाता है। यह दिमाग में डोपामिन नाम के केमिकल को तेजी से बढ़ाती है और न्यूरो सिस्टम को उत्तेजित करती है और तेज़ ऊर्जा, जागरूकता और आनंद की भावना देती है। मेथामफेटामाइन को लोग अलग-अलग तरीकों से लेते हैं जिसमें धूम्रपान, इंजेक्शन, स्नोर्टिंग और टैबलेट या कैप्सूल के रूप में लिया जाता है। इसके गंभीर शारीरिक और मानसिक दुष्परिणाम होते हैं। मेथामफेटामाइन बहुत जल्दी लत लगा देती है।
इंदिरा के हत्यारे का भतीजा निकाला न्यूजीलैंड का बड़ा ड्रग-तस्कर:22 साल की सजा हो चुकी, दावा- पहचान छुपाने की याचिका वापस ली
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