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संत मलूक दास जी के 452 वें जयंती महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के 8 वें दिन भगवान सीताराम की चल रही निकुंज अष्ट्यम लीला में भगवान का व्याहुला,रजनी विलास शयनयाम दर्शन का मंचन हुआ। इस लीला का दर्शन करने के लिए योग गुरु बाबा रामदेव,श्री वैष्णव सम्प्रदाय के प्रमुख दक्षिण भारतीय संत चिन्ना जियर स्वामी और गुरु शरणनंद महाराज पहुंचे। भगवान सीताराम की ब्रज में पहली बार हो रही निकुंज की अष्टयाम लीला के दर्शन कर संत और भक्त भाव विभोर हो गए। ईश्वर तत्व तो गुरु तत्वदर्शी – चिन्ना जीयर स्वामी ईश्वर स्वयं में पूर्ण तत्व होता है, जिसको समझने की दृष्टि मात्र गुरु में ही होती है, क्योंकि आचार्य-गुरु तत्वदर्शी होता है। यह विचार स्थानीय पानी घाट स्थित श्री पहाड़ी बाबा गौशाला में श्रीमद्जगदगुरु मलूक दास जी के 452वें जयंती महोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संत चिन्ना जियर स्वामी ने व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अपने श्रीमुख से अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, लेकिन उन्होंने शरशैय्या पर लेटे भीष्म पितामह के पास उन्हें तत्वज्ञान प्राप्त करने के लिए भेजा। इस पर भीष्म पितामह ने केशव से पूछा कि जब अपने अपने ही मुख से जब अर्जुन को गीता जैसा सारगर्भित ज्ञान दे दिया तो मेरे पास क्या शेष रह गया। इस पर भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि क्योंकि मैं स्वयं ही तत्व हूं, इसलिए मैं स्वयं को ही नहीं देख सकता। क्योंकि आप आचार्य हैं, इसलिए आप तत्वदर्शी हैं और आप ही मुझे ठीक से समझ सकते हैं। जब आप मुझे समझ सकते हैं, तभी आप मेरे विषय में सटीक समझा सकते हैं। इस अवसर पर उन्होंने मलूक पीठाधीश्वर डॉ राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज को वास्तविक तत्वदर्शी आचार्य बताया। भक्ति रस का बोध प्रथम बार प्राप्त हुआ – बाबा रामदेव कार्यक्रम में पहुंचे बाबा रामदेव ने कहा कि मै सदा से योग शास्त्र वेद वेदांग से तो परिचित था, लेकिन भक्ति रस का इतना अद्भुत दर्शन एवं श्रवण मुझे पहली बार प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने जीवन काल में पहली बार इतनी देर किसी लीला का दर्शन किया, यह महाराज जी की ही कृपा हुई है। उन्होंने कहा कि पहली बार विरक्तों में भी परा भक्ति का दर्शन मुझे हुआ। मुझे पहली बार समझ नहीं आ रहा है कि मैं शिव भक्त हूं या कृष्ण भक्त। महाराज जी की वाणी के श्रवण से मुझे अभेद भाव प्राप्त हुआ है। बिना गुरु के निर्देशन के अष्ट याम लीला समझना असम्भव – कार्ष्णी गुरु शरणानंद महाराज प्रभु की अष्ट याम लीला उनकी अति अंतरंग लीला है, जिसे भौतिक दृष्टि से देखने पर समझना असम्भव है, इसको समझने के लिए गुरु के निर्देशन से प्राप्त ज्ञान की सहायता लेनी पड़ती है। उक्त विचार व्यक्त किए श्री सीताराम निकुंज अष्ट याम लीला के ब्याहुला एवं शयन याम लीला दर्शन करने पहुंचे कार्ष्णी गुरु शरणानंद महाराज ने। इस अवसर पर मलूक पीठाधीश्वर डॉ राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज ने कहा कि जिस प्रकार से कोल्हू में सरसों को पिर कर तेल और छूंछ अलग – अलग कर दिया जाता है, ठीक उसी प्रकार से प्रभु जीव की चौरासी लाख योनि में एक कोल्हू की भांति पिर कर उसके विकार,पाप अलग कर उसे निर्मल बना देते हैं। लेकिन जो प्रभु के शरणागत हो जाता है, उसे चौरासी लाख योनियों में पेरे जाने की आवश्यकता नहीं होती।
मलूक पीठ गौशाला पहुंचे बाबा रामदेव:भगवान सीताराम की निकुंज अष्ट्यम लीला का किया दर्शन, कहा भक्ति रस का हुआ पहली बार बोध
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