15 घंटे पहले
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देवी-देवताओं की मूर्तियां घर में रखने की परंपरा है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य से जुड़ी है। शास्त्रों के अनुसार, घर में स्थापित मूर्तियों की विधिवत पूजा की जाए, तो घर में सुख-शांति बनी रहती है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा से जानिए पूजा-पाठ से जुड़ी मान्यताएं…
वास्तु शास्त्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि घर में खंडित मूर्तियां रखने से बचना चाहिए। अगर हम खंडित मूर्तियों की पूजा करते हैं और पूजा में जैसी ही हमारी नजर मूर्ति के टूटे हिस्से पर पड़ती है, हमारा ध्यान भटक जाता है। पूजा में एकाग्रता नहीं बन पाती है। मन अशांत हो जाता है। यही कारण है कि खंडित मूर्तियों का विसर्जन करने का विधान है। पूजा स्थल घर के उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए। देवी-देवताओं की पूजा के लिए ये दोनों दिशाएं बहुत शुभ मानी जाती है।
पूजा केवल हाथ जोड़कर मंत्र पढ़ने तक सीमित नहीं है। शास्त्रों में इसे ध्यान और भक्ति के साथ करने पर जोर दिया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब मूर्ति पूरी होती है, तो पूजा करने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से पूजा में केंद्रित रहता है। एकाग्र और शांत मन से की गई पूजा जल्दी सफल होती है, ऐसी मान्यता है।
घर में मूर्तियों के लिए सावधानियां
अखंड मूर्तियों का चयन – घर में केवल पूरी और अखंडित मूर्तियों की स्थापना करें।
साफ-सफाई – घर के मंदिर में नियमित पूजा करें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
एकाग्रता बनाए रखें – पूजा के समय हमारा पूरा ध्यान केंद्रित रहना चाहिए, जिससे भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा दोनों मजबूत हों।
किस धातु की मूर्ति होती है शुभ
घर के लिए सोना, चांदी, तांबा, पीतल, स्फटिक, पारद से बनी मूर्तियां बहुत शुभ मानी गई हैं। लोहे, स्टील, एल्यूमीनियम से बनी मूर्तियां पूजा के लिए शुभ नहीं मानी जाती हैं, क्योंकि पूजा में पानी, दूध, दही से मूर्तियों का अभिषेक किया जाता है और इन चीजों से लोहे-एल्यूमीनियम की मूर्तियां खराब हो जाती हैं। अगर धातु की मूर्ति नहीं रखना चाहते हैं, तो मिट्टी या पत्थर से बनी मूर्ति भी श्रेष्ठ होती हैं।
शिवलिंग हर स्थिति में होता है पूजनीय
पं. शर्मा कहते हैं कि शिवलिंग को शिव जी का निराकार स्वरूप माना जाता है, इसलिए खंडित शिवलिंग भी पूजनीय होता है। ध्यान रखें घर में अंगूठे के पहले भाग से बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। अन्य देवी-देवताओं की भी ज्यादा बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। घर के मंदिर में 8-10 इंच से बड़ी मूर्तियां रखने से बचना चाहिए।
