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सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों का भविष्य इस वक्त भगवान भरोसे है। नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन सरकार की बेरुखी इस कदर है कि जिले के 425 अति-जर्जर स्कूलों के नवनिर्माण के लिए अब तक एक रुपया भी जारी नहीं किया गया है। इन स्कूलों को फिर से खड़ा करने के लिए 432.97 करोड़ रुपए की दरकार है, लेकिन फाइलें जयपुर में धूल फांक रही हैं। आगामी जुलाई में मानसून की दस्तक के साथ ही इन बच्चों के सिर पर छत का संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि प्रशासन अब तक इन खतरनाक घोषित हो चुके भवनों को गिराने (कंडम घोषित कर जमींदोज करना) की हिम्मत तक नहीं जुटा पाया है। डीएफएमफटी का सहारा ऊंट के मुंह में जीरा बराबर राहत के नाम पर डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी ) फंड से 79 करोड़ रुपए की स्वीकृति तो मिली है, लेकिन जिले की जरूरत के सामने यह राशि बेहद कम है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह फंड भी उन 425 स्कूलों के लिए नहीं है जो ढहने की कगार पर हैं, बल्कि अन्य छोटे कार्यों के लिए है। 2115 स्कूलों की मरम्मत के प्रस्ताव भी जयपुर में लंबित पड़े हैं। खुले आसमान के नीचे या उधार के कमरों में भविष्य जर्जर घोषित स्कूलों के बच्चे फिलहाल जुगाड़ की व्यवस्थाओं में पढ़ रहे हैं। कहीं किसी पुरानी सरकारी बिल्डिंग, कहीं ग्राम पंचायत के कमरों में तो कहीं खुले आसमान के नीचे क्लास लग रही है। झालावाड़ हादसे के बाद सरकार ने सर्वे तो करवा लिया, लेकिन निर्माण के नाम पर चुप्पी साध ली गई। सर्वे रिपोर्ट : कोटड़ा में सबसे ज्यादा 186 भवन गिराऊ
तकनीकी दल के भौतिक सत्यापन में 425 विद्यालय ऐसे मिले जो बच्चों के बैठने लायक ही नहीं हैं। सबसे डरावनी तस्वीर कोटड़ा की है, जहां सर्वाधिक 186 स्कूल जर्जर हैं। “झालावाड़ की घटना के बाद सर्वे हुए 9 महीने बीत गए, लेकिन ईंट तक नहीं लगी। अब जुलाई में बारिश शुरू होने वाली है। बालक, अभिभावक और शिक्षक खौफ में हैं कि कहीं कोई दीवार न गिर जाए।” -शेर सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, पंचायती राज व माध्यमिक शिक्षक संघ “हम वर्कऑर्डर जारी कर रहे हैं। जैसे ही सरकार से बजट मिलता है, काम में तेजी लाई जाएगी। हमारी कोशिश है कि जल्द काम हो जाए।” -ननिहाल सिंह चौहान, एडीपीसी, समग्र शिक्षा अभियान, उदयपुर
नौनिहालों की जान आफत में:425 स्कूल खंडहर, 432 करोड़ रुपए फाइलों में; बारिश में सिर छिपाने की भी जगह नहीं
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