लुधियाना कस्टोडियल डेथ केस में 6 साल बाद बड़ा फैसला:4 पुलिसकर्मियों पर चलेगा हत्या का केस, 7 जगह आई थी चोट

Actionpunjab
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लुधियाना में छह साल पुराने चर्चित कस्टोडियल डेथ (हिरसत में मौत) मामले में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। लुधियाना की अदालत ने रिकवरी एजेंट दीपक शुक्ला की मौत के मामले में चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। दीपक शुक्ला के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उसके शरीर पर 7 जगह चोट के निशान हैं। अदालत ने SI ऋचा शर्मा, एएसआई जसकरण सिंह, एएसआई चरणजीत सिंह और कांस्टेबल जुगनू के खिलाफ IPC की धारा 302 (हत्या), 166, 166-A और 34 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पहले इस केस में तीन पुलिसकर्मी नामजद थे, लेकिन अब अदालत ने कांस्टेबल जुगनू को भी आरोपी बनाने का आदेश दिया है। पहले था गैर-इरादतन हत्या का मामला
शुरुआत में पुलिसकर्मियों पर गैर-इरादतन हत्या (IPC 304) का केस दर्ज किया गया था। मृतक के परिवार ने लगातार हत्या की धाराएं लगाने की मांग की और छह साल तक कानूनी लड़ाई जारी रखी। अदालत ने क्या कहा
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध सबूतों और रिकॉर्ड को देखने के बाद आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई के पर्याप्त आधार हैं। यह फैसला धारा 204 CRPC के तहत लिया गया है। अदालत ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पहली नजर में मामला संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का प्रतीत होता है और पुलिस की भूमिका की जांच जरूरी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले राज
जगराओं की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. गुरबिंदर कौर की गवाही इस केस में अहम रही। मृतक के शरीर पर 7 चोटें पाई गईं। सभी चोटें मौत से पहले लगी थीं। चोटों से फेफड़े, किडनी और दिल प्रभावित हुए। मरने वाले को कोई पुरानी बीमारी नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक इन्हीं चोटों के कारण दीपक की मौत हुई। क्या है पूरा मामला
दीपक शुक्ला को 15 फरवरी 2020 को वाहन चोरी केस में उठाया गया। परिवार का आरोप: एक हफ्ते तक अवैध हिरासत में रखा गया। 22 फरवरी को कोर्ट में पेश किया गया। परिवार ने पुलिस पर रिश्वत के लिए 1.25 लाख की मांगने के आरोप लगाए हैं। परिवार के मुताबिक 25 हजार देने के बाद पत्नी को छोड़ा गया था। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने दीपक को हिरासत में बेरहमी से पीटा। आखिरी मुलाकात और मौत
26 फरवरी 2020 को लुधियाना सेंट्रल जेल में पिता विनोद शुक्ला ने दीपक से मुलाकात की। उस समय दीपक गंभीर हालत में था। उसके मुंह से खून आ रहा था। शरीर पर चोटों के निशान थे। उसी रात करीब 9:30 बजे दीपक की हालत बिगड़ी और कुछ घंटों बाद उसकी मौत हो गई। परिवार का संघर्ष रंग लाया
मौत के बाद परिवार ने लगातार प्रदर्शन किए, लेकिन शुरुआत में पुलिस के खिलाफ केस दर्ज नहीं हुआ। अगस्त 2020 में कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज किया। पुलिसकर्मियों को कुछ समय के लिए सस्पेंड किया गया। बाद में बहाल कर दिया गया। अब छह साल बाद अदालत के आदेश से हत्या का केस चलने का रास्ता साफ हो गया है।

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