मोहाली में दंपति की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट सख्त:डेढ़ व पांच साल के बच्चों को भी थाने ले गई थी पुलिस, अधिकारियों से जवाब तलब

Actionpunjab
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मोहाली में एक दंपति की गिरफ्तारी और उनके छोटे बच्चों को थाने ले जाने के मामले में पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को तय की गई है। मामला मोहाली के फेज-11 थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 150 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता मोनिका छाबड़ा की ओर से कोर्ट में कहा गया कि 20 नवंबर 2025 को दर्ज इस मामले में लगाए गए आरोप जमानती थे। इसके बावजूद पुलिस ने बिना ठोस कारण बताए सुबह-सुबह घर में घुसकर दंपति को गिरफ्तार कर लिया। छोटे बच्चों को भी ले गई पुलिस सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि पुलिस दंपति के दो छोटे बच्चों, जिनकी उम्र करीब डेढ़ साल और 5 साल है, को भी अपने साथ थाने ले गई। जबकि बच्चे किसी भी मामले में आरोपी नहीं थे। बाद में जब दंपति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो उन्हें उसी दिन जमानत मिल गई। याचिकाकर्ता पक्ष के वकील ने कोर्ट को बताया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के तय दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक गिरफ्तारी कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपवाद है, खासकर उन मामलों में जहां सजा 7 साल तक हो सकती है। संविधान के अधिकारों का उल्लंघन बताया याचिका में कहा गया कि पुलिस की इस कार्रवाई से संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन हुआ है। साथ ही, नाबालिग बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्याय के लिए हाईकोर्ट का रुख किया गया।

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