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जगराओं नगर कौंसिल एक बार फिर विवादों में घिर गई है। शहर में कूड़े के ढेरों को हटाने के लिए लाखों रुपये के प्रस्ताव पारित होने के बावजूद कौंसिल परिसर में कूड़े के ढेर में आग लगने की घटना सामने आई है। इस आग से उठने वाले जहरीले धुएं ने आसपास के लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। जानकारी के अनुसार, पार्षदों की पिछली बैठक में कूड़े के ढेरों को हटाने के लिए लगभग 20 लाख रुपये का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बावजूद कौंसिल परिसर में कूड़े के ढेर में दोबारा आग लग गई। यह पहली घटना नहीं है; इससे पहले भी ऐसी आग के कारण आधे से अधिक कूड़ा राख में बदल चुका है। कूड़े में लगी आग से निकलने वाले जहरीले धुएं और बदबू ने आसपास के निवासियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। लोगों का कहना है कि धुएं के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो गया है और पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई है। अंधेरे का फायदा उठाकर लगाते हैं आग लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कूड़े को जानबूझकर आग लगाई जाती है, ताकि उसे उठाने की आवश्यकता न पड़े। उनका कहना है कि यह आग अक्सर देर शाम या रात के अंधेरे में लगती है, जबकि दिन के उजाले में ऐसा नहीं होता, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर कौंसिल के पीछे स्थित डॉक्टर किशन सिंह के अस्पताल और घर के मालिक ने भी हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि कौंसिल परिसर में आग लगी होती है, लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ी कौंसिल में मौजूद होने के बावजूद आग को तुरंत बुझाया नहीं जाता। वहीं, पार्षद रविंदरपाल राजू कामरेड ने इस मामले में भ्रष्टाचार की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि जब कूड़ा उठाने के लिए 20-25 लाख रुपये का प्रस्ताव पारित किया गया था, तो फिर कूड़ा उठाने की बजाय उसे आग के हवाले क्यों किया जा रहा है। सेहत पर गंभीर असर डॉ. किशन सिंह के मुताबिक कूड़े में अक्सर प्लास्टिक, रबर, केमिकल और मेडिकल वेस्ट भी होता है। जब इसे जलाया जाता है तो इससे निकलने वाली जहरीली गैसें
जगराओं में कूड़े के ढेर में फिर लगी आग:कौंसिल परिसर में घटना; 20 लाख का प्रस्ताव लाने के बाद भी नहीं उठाया कचरा
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