मेरठ में बढ़ती गर्मी और प्रदूषण का डबल अटैक:42 डिग्री तापमान के साथ 285 पहुंचा AQI , हीट स्ट्रोक के साथ बढ़े सांस के मरीज

Actionpunjab
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मेरठ में अप्रैल के तीसरे हफ्ते में ही जून जैसी भीषण गर्मी का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। शहर में रोजाना की तरह बीते दिन भी अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री के आसपास रहा। इसके साथ ही हवा की गुणवत्ता भी बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई है और शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 285 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
गर्मी और प्रदूषण के इस खतरनाक मेल ने आमजन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दोपहर के समय चलने वाली तेज लू और हवा में बढ़ी धूल के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल मौसम में किसी राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। अस्पतालों में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। छाती रोग विशेषज्ञों के पास सांस लेने में दिक्कत, एलर्जी और अस्थमा के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। खास बात यह है कि इन मरीजों में गांवों से आने वालों की संख्या अधिक है। डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों गांवों में खेतों में फसल की कटाई और बुआई के कार्यों के चलते धूल-मिट्टी ज्यादा उड़ रही है, जिससे एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
वहीं फिजिशियन के पास हीट स्ट्रोक, वायरल बुखार और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। विशेष रूप से वे लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं जो रोजाना धूप में काम करने को मजबूर हैं, जैसे मजदूर, डिलीवरी कर्मी और खुले में काम करने वाले अन्य लोग। चिकित्सकों का कहना है कि तेज धूप और खराब हवा का यह संयोजन शरीर पर दोहरा असर डालता है। जहां एक ओर लू से शरीर का तापमान बढ़ता है, वहीं प्रदूषण फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और मास्क का उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही, सांस के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की हिदायत दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि हवा की गुणवत्ता में भी तत्काल सुधार की संभावना कम है।

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