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नमस्कार चूरू में ‘बाबोसा’ की बड़ी चर्चा रही। राजनीति-अनुभव-उपनाम और उपमाओं को लेकर दिग्गजों ने मन की बात कही। दिल्ली में गहलोत-पायलट मिले तो पत्रकारों की चुटकी ले ली गई। नागौर में किसानों को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक बड़ी बात कह गए और दरियादिल दूल्हेराजा सोशल मीडिया पर वायरल हैं। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. राजू भैया, भाईसाहब और बाबोसा की ‘पहेली’ बाबोसा। यह एक संबोधन भर नहीं है। बल्कि एक उपाधि है। इसे वही पा सकता है, जिसमें ‘शेखावतजी’ जैसा माद्दा हो। मंच पर यही जाहिर करने का प्रयास चल रहा था। सीनियर नेता राजेंद्र राठौड़जी बोले- मैं जब चूरू आया था तो लोग राजू भैया कहकर बुलाने लगे। फिर भाईसाहब, फिर काकाजी। अब ताऊसा और बाबोसा कहकर पुकारते हैं। बात पर जनता और मंच साथ खिलखिलाए। घुमा-फिराकर सार यह था कि राठौड़ साहब ने बहुत लंबे समय तक पार्टी और जनता की सेवा की। तब जाकर ‘बाबोसा’ कहलाने के हकदार बने। इसी मंच पर सिक्किम के राज्यपाल महोदय ने बात में तड़का लगाया। बोले- पार्टी में एक नियम है। मुझे भी ‘बाबोसा’ कहकर राज्यपाल बना दिया गया। ठहाके गूंज उठे। लेकिन बात मुकम्मल की मुख्यमंत्रीजी ने। कहा- मंच पर भाभीजी भी बैठी हैं। तो राठौड़ साहब हमारे लिए तो अभी भाई साहब ही हैं। हालांकि बात में ‘अपनत्व’ था, ‘डिमोशन’ की भावना नहीं। मंच से राठौड़ साहब ने 1983 की फिल्म ‘अवतार’ के गीत का मुखड़ा शायरी के अंदाज में सुनाया, और बात का निचोड़ रख दिया। उन्होंने कहा- दिन महीने साल गुजरते जाएंगे
हम प्यार में जीते, प्यार में मरते जाएंगे
देखेंगे, देख लेना.. 2. गहलोत बोले- फिर कहोगे बनती नहीं इंसान वही महान जिसके अंदर एक श्मशान हो। बुरी लगने वाली बातें जो दफ्न करता जाएगा, वही ऊपर की सीढ़ी चढ़ता जाएगा। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर दो दिग्गज नेताओं का मधुर मिलन हुआ। इन्हें लेकर अक्सर चर्चा रही है कि ‘दोनों में बनती नहीं’। गहलोत साहब कार से उतर रहे थे। उनके पीछे-पीछे पहुंचे पायलट जी ने अगवानी की। बढ़कर हाथ मिलाया। गहलोत प्रसन्नचित्त नजर आए। पत्रकारों को देख उलाहना सा दिया। बोले- देख लो भैया। फिर कहोगे कि बनती नहीं है। अब कैसे बताएं आपको। वहां ठहाका सा गूंजा। दोनों नेता मुख्यालय की सीढ़ियां चढ़ने लगे। वे बातें पुरानी हो गईं जब मानेसर की बातें होती थीं। होटलों की बातें होती थीं। ‘ना’ से शुरू होने वाली उपमाएं अनुप्रास अलंकार में पिरोकर सुनाई जाती थीं। पूनियाजी तो किताब में आंतरिक संघर्ष का चैप्टर और कार्टून दिखाकर गिफ्ट तक कर आए थे। खैर, राजनीति में न दोस्ती स्थायी रहती है, न दुश्मनी। मशहूर शायर निदा फाजली का एक प्रसिद्ध शेर है- दुश्मनी लाख सही खत्म न कीजे रिश्ता, दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए। 3. नेताजी ने बयान की किसान की ‘टीस’ नागौर में एक सीमेंट कंपनी के खिलाफ किसान कई साल से आंदोलन कर रहे हैं। मुद्दा प्रदूषण, मुआवजा और जमीन अधिग्रहण आदि का है। गुस्साए किसान ट्रैक्टरों का कारवां लेकर कलेक्ट्रेट की तरफ निकले। ट्रैक्टर रोके गए तो पैदल चल पड़े। आंदोलन के तहत इस प्रदर्शन को पूर्व विधायकजी लीड कर रहे थे। प्रदर्शन कर लेने के बाद धरनानुमा सभा हो गई। सभा में पूर्व विधायक ने किसान की दुखती रग पर हाथ रख दिया। बोले- कंपनी से हम क्या मांग रहे हैं? हम तो अपनी जमीन ही दे रहे हैं। जमीन का मतलब हैसियत। जमीन से भावना का जुड़ाव होता है। हम प्रशासन से वार्ता कर रहे थे तो वहां कई अफसर भी थे। अफसर तो बड़े पैसे वाले लोगों की तरफ ही बोलते हैं। मेरा बेटा या किसी किसान का बेटा भी यदि कलेक्टर-अधिकारी बन जाए तो वह उद्योगपति के बारे में पहले सोचेगा। हो सकता है कि बेटे के साथ भी सड़क पर टकराव हो जाए। क्योंकि अधिकारी वही चाहेगा जो बड़े पैसेवाला चाहेगा। यही देश की विडंबना है। उन्होंने आगे कहा- किसान को अन्नदाता कहकर नेता चुनाव के वक्त लाड़ लड़ाते हैं। किसान को देश की धड़कन कहते हैं। ऐसा होता तो हम यहां धूप में पड़े होते क्या? 4. चलते-चलते.. सावों का सीजन है। शुभ मुहूर्त का अपना महत्व। तारे-सितारे इधर-उधर हो गए तो जिंदगी भर पता नहीं क्या झेलना पड़े। पंडित लोग अक्सर सावधान करते हैं। अपने घर से दूल्हा शुभ घड़ी में विवाह स्थल के लिए निकला। रात का समय। बीयाबान सन्नाटा। निर्जन रास्ते पर सड़क के एक ओर बाइक खड़ी दिखी। बाइक के पास एक परेशान सा लड़का। पीछे कोई महिला। जो मरीज सी नजर आ रही थी। दूल्हे ने कार को रुकवाया। बाइक सवार से बात की तो पता चला कि टायर पंचर हो गया है। महिला को इलाज की जरूरत है। दूल्हे ने वहीं औजार जुटाए और पंचर बनाने में जुट गया। शुभ मुहूर्त वही जिसमें इंसान के हाथों कोई नेक काम हो जाए। निश्चित ही इस दूल्हे का इंतजार करने वाली सौभाग्यशाली है। इनपुट सहयोग- हनुमान तंवर (नागौर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी।
भैया, भाई साहब और बाबोसा की 'पहेली':सचिन पायलट ने आगे बढ़कर गहलोत का स्वागत किया, पूर्व सीएम ने ले ली चुटकी
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