TMC West Bengal Election Result Controversy; Mamata Banerjee – SIR Voters List

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नई दिल्ली/कोलकाता1 घंटे पहले

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ममता बनर्जी ने 5 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। BJP-चुनाव आयोग पर साजिश के आरोप लगाए थे। - Dainik Bhaskar

ममता बनर्जी ने 5 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। BJP-चुनाव आयोग पर साजिश के आरोप लगाए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा, ‘बंगाल में सीटों पर जीत का अंतर SIR में कटे वोटों से कम मामले में ममता बनर्जी और अन्य लोग नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं।’

TMC ने दावा किया कि हालिया विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर जीत का अंतर, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान हटाए गए वोटों की संख्या से कम था।

दरअसल, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

इसी दौरान TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने बागची की उस टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अगर जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम है, तो अदालत शिकायतों पर विचार कर सकती है।

कोर्ट रूम LIVE

  • सुप्रीम कोर्ट: इस मामले में ममता और अन्य लोग नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं।
  • चुनाव आयोग अधिवक्ता डीएस नायडू: इसका उपाय चुनाव याचिका है। SIR से जुड़े मुद्दों और मतदाता सूची संशोधन के दौरान वोट जोड़ने या हटाने के खिलाफ अपीलों के लिए ही चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
  • कल्याण बनर्जी: मेरे एक उम्मीदवार 862 वोटों से हारे, जबकि दिलचस्प बात यह है कि उस निर्वाचन क्षेत्र में SIR के दौरान 5,550 वोट हटा दिए गए थे। ऐसी 31 सीटें हैं, जहां जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम था। हालांकि लिस्ट नहीं दी। TMC और भाजपा के बीच कुल वोटों का अंतर करीब 32 लाख था और वोट डिलीशन के खिलाफ 35 अपीलें अभी भी पेंडिंग हैं।
  • न्यायमूर्ति बागची: परिणामों, वोट हटाने आदि के बारे में जो भी कहना है, उसके लिए अलग अंतरिम आवेदन दाखिल करना होगा। चुनाव आयोग जो यह कह रहा है कि चुनाव याचिका ही उपाय है, वह अपनी जवाबी हलफनामे में यह बात रख सकता है।
  • एक याचिकाकर्ता वकील मेनका गुरुस्वामी: यह आशंका है कि अब वोट हटाने के खिलाफ अपीलों के निपटारे में चार साल लग सकते हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट: हम यह देखेंगे कि अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया में कोई सुधार किया जा सकता है या नहीं।

भाजपा को बंगाल में 207 सीटें मिलीं, पहली बार सरकार बनाई

हाल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतीं हैं, जबकि TMC को 80 सीटें मिली हैं। इन चुनावों में राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई।

भाजपा को कुल 2 करोड़ 92 लाख 24 हजार 804 वोट मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस को 2 करोड़ 60 लाख 13 हजार 377 वोट मिले हैं। BJP को TMC से 32 लाख 11 हजार 427 ज्यादा वोट मिले हैं। यानी 293 सीटों के हिसाब से भाजपा को हर सीट पर औसत 10,960 वोट ज्यादा मिले।

राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से कुल 91 लाख वोट कटे। यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोटरों के नाम काटे गए। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा।

भाजपा ने 128 सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं

  • बंगाल में 30 हजार से कम मार्जिन पर जीत वाली 176 सीटों में भाजपा की 128 सीटें हैं। वहीं, 30 हजार से ज्यादा मार्जिन पर जीत वाली 117 सीटों में भाजपा की 79 सीटें हैं। तृणमूल की 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम और 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा है।
  • 2021 में भाजपा की 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम ​मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में ऐसी 93.5% थीं।
  • साल 2021 में 121 सीटों पर तृणमूल की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 94 पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दर्शाते हैं। इस बार भाजपा की 25 सीटें ऐसी हैं, जहां हटाए या अयोग्य घोषित मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक है।

13 अप्रैल: कोर्ट बोला- जीत के अंतर से ज्यादा वोटर वोट नहीं डाल पाए तो दखल देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल ने कहा था कि चुनाव परिणाम में तभी दखल दिया जाएगा, जब बड़ी संख्या में मतदाता बाहर किए गए हों और वह संख्या जीत के अंतर को प्रभावित करती हो।

जस्टिस बागची ने आयोग से कहा था कि मान लीजिए कि जीत का अंतर 2% है और 15% मतदाता वोट नहीं डाल सके, तो हमें इस पर सोचना होगा। यह चिंता का मामला हो सकता है। यह मत समझिए कि बाहर किए गए मतदाताओं का सवाल हमारे दिमाग में नहीं है।

इस उदाहरण से आसानी से समझिए…

मान लीजिए विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 95 हजार वोट तो मार्जिन हुआ 5 हजार वोट। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं तो असर नहीं। लेकिन ज्यादा हैं तो नतीजों पर असर संभव।

बंगाल में 11.85% नाम हटे, ज्यादातर बांग्लादेश बॉर्डर के पास

पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे। इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए। लगभग 11.85% वोटर कम हो गए। यानी अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं।

चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटे। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। वहीं, 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटे।

देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज

गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे।

बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें…

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