मेरठ: DM के फर्जी हस्ताक्षर से सरकारी जमीन वक्फ के:तत्कालीन अधिकारी शेषनाथ पांडेय पर भूमि घोटाला और छात्रवृत्ति फर्जीवाड़े का आरोप

Actionpunjab
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मेरठ में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शेषनाथ पांडेय पर वक्फ बोर्ड भूमि घोटाले और छात्रवृत्ति फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप है। जांच में सामने आया है कि उन्होंने जिलाधिकारी (DM) के फर्जी हस्ताक्षर कर करोड़ों की सरकारी जमीन वक्फ बोर्ड के नाम कर दी थी। इस भ्रष्टाचार के कारण वर्तमान जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रुहेल आजम को निलंबित किया गया है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के सीओ जितेंद्र कालरा इस मामले की जांच कर रहे हैं। जांच में पता चला कि शेषनाथ पांडेय ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर घोसीपुर गांव में स्थित करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि को तत्कालीन डीएम बी. चंद्रकला के फर्जी हस्ताक्षर से वक्फ बोर्ड के नाम कर दिया था। इसके अलावा, शेषनाथ पांडेय पर उस समय कई मदरसों को मान्यता देने और महिला छात्रावास बनाने के नाम पर भी भ्रष्टाचार करने का आरोप है। जांच में ये सभी आरोप साबित हो चुके हैं। इसी के चलते भाजपा सरकार आने के बाद शेषनाथ पांडेय को पहले निलंबित किया गया और फिर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। विश्व हिंदू महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री विनोद कुमार ने इस मामले की शिकायत शासन से की थी, जिसके बाद एक जांच टीम गठित की गई। जांच में खुलासा हुआ कि तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और सहायक सर्वे आयुक्त वक्फ शेषनाथ पांडेय, तहसीलदार ओपी दुबे, कानूनगो नेतराम, एसडीएम चंद्र प्रकाश सिंह और तहसीलदार रमेश चंद्र यादव ने मिलकर घोसीपुरा की दो बीघा, सात बिस्सा, छह बिस्वांसी जमीन को पहले ‘पीर मेला’ के नाम दर्ज कराया। इसके बाद, सहायक सर्वे आयुक्त शेषनाथ पांडेय ने खुद ही जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर जमीन को वक्फ बोर्ड के नाम चढ़ा दिया। जांच में यह साबित होने के बाद देहली गेट थाने में तत्कालीन तहसीलदार भगत सिंह की तहरीर पर उपरोक्त सभी तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, समाजवादी पार्टी के शासनकाल में 2016 में यह मुकदमा दर्ज होने के बावजूद, उसी वर्ष सरकारी दबाव में इसमें फाइनल रिपोर्ट (FR) लगा दी गई और कोई कार्रवाई नहीं हुई। विनोद कुमार का दावा है कि घोसीपुरा की इस जमीन की कीमत उस समय करोड़ों रुपये थी। शेषनाथ पांडेय ने मुस्लिम लोगों से पैसे लेकर इसे वक्फ के नाम कर मुस्लिमों को कब्जा दिला दिया था। उनका अनुमान है कि जब इस मामले की पूरी जांच होगी, तो यह घोटाला 100 करोड़ रुपये से भी अधिक का निकलेगा।

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