फरीदाबाद नगर निगम के 34 पार्षदों ने जवाब दाखिल किया:मेयर और निगम कमीश्नर को जिम्मेदार बताया, हरियाणा सरकार ने जारी किया था नोटिस

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फरीदाबाद नगर निगम में फाइनेंस कमेटी तथा सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर जारी गतिरोध के बीच 34 पार्षदों ने निगम कमीश्नर द्वारा जारी नोटिस का जवाब दाखिल कर दिया है। पार्षदों ने अपने जवाब में इन पदों के गठन में हुई देरी के लिए मेयर प्रवीण बतरा जोशी और निगम कमीश्नर धीरेन्द्र खड़गटा को जिम्मेदार ठहराया है। 25 नवंबर को हुई थी सदन की बैठक सोमवार को निगम आयुक्त को सौंपे गए जवाब में पार्षदों ने कहा कि 25 नवंबर को नगर निगम सदन की पहली बैठक बुलाई गई थी। बैठक के एजेंडे में सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर के चुनाव और फाइनेंस कमेटी के गठन की प्रक्रिया भी शामिल थी। मेयर और निगम कमीश्नर नही पहुंचे पार्षदों का कहना है कि उस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री सहित सभी पार्षद मौजूद थे, लेकिन मेयर और निगम कमीश्नर बैठक में नहीं पहुंचे। उनके अनुपस्थित रहने के कारण निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और चुनाव तथा कमेटी गठन का कार्य अधूरा रह गया। हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे पार्षदों ने अपने जवाब में कहा है कि यदि जल्द ही सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और फाइनेंस कमेटी का गठन नहीं किया गया तो वे न्यायिक हस्तक्षेप के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। गौरतलब है कि नगर निगम में इन पदों के चुनाव और फाइनेंस कमेटी के गठन को लेकर पिछले कई महीनों से राजनीतिक खींचतान बनी हुई है, जिसके चलते नगर निगम की कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। सरकार ने जारी किया था नोटिस हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने नगर निगम को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 7 दिन में जवाब मांगा है। सरकार ने निगम के मेयर और कमीश्नर को 27 मई को नोटिस जारी किया। जिसमें कहा गया था कि नगर निगम द्वारा फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट्स कमेटी का गठन नहीं किए जाने से विकास कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं और जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम के चुनाव 2 मार्च 2025 को हुए थे, जबकि मेयर और पार्षदों ने 25 मार्च 2025 को शपथ ली थी। इसके बावजूद 14 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट्स कमेटी का गठन नहीं हो पाया है। सरकार ने इसे हरियाणा म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट 1994 के प्रावधानों का उल्लंघन माना है।

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