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कोलकाता12 मिनट पहलेलेखक: सुनील मौर्य
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सांसदों की मीटिंग की यह तस्वीर सामने आई है। जिसमें सुखेंदु शेखर भी नजर आ रहे हैं।
विधायकों के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सांसद भी ममता का साथ छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। सोमवार दोपहर 20 सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और BJP के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर मीटिंग की।
इस दौरान सुबह TMC के राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे चुके सुखेंदु शेखर रे भी मौजूद रहे। उधर, बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी भी इनसे मिलने पहुंचे। 20 में से लोकसभा और राज्यसभा के कितने सांसद थे यह साफ नहीं हो पाया है।
बैठक में काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी मौजूद रहे। बाकी सांसदों के नाम सामने नहीं आए हैं।
सूत्रों के मुताबिक TMC के ये सभी सांसद अलग गुट बना सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वे जल्द ही इस बारे में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक लेटर लिखेंगे।
लोकसभा में TMC के अभी 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। इससे पहले 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। इस गुट ने ऋतब्रत को अपना नेता बनाया है।
सुखेंदु का दावा- TMC के लोग से ममता से नाराज

TMC के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया और पार्टी भी छोड़ दी। त्यागपत्र में उन्होंने ममता के 15 साल के अराजक शासन को पार्टी की हार का नतीजा बताया और भाजपा की तारीफ की थी। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने सुखेंदु शेखर का इस्तीफा मंजूर कर लिया है।
सुखेंदु ने इस्तीफे के बाद मीडिया से कहा था कि पार्टी के कई लोग ममता मनमाने ढंग से पार्टी चला रही थीं, इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
सुखेंदु शेखर की राज्यसभा सीट पश्चिम बंगाल से है और उनका कार्यकाल 2029 तक था। सीट खाली हो चुकी है, अब इस पर उपचुनाव कराया जा सकता है।
इस्तीफे में लिखी 5 अहम बातें…
- यह शासन बड़े पैमाने पर बेलगाम भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे क्षेत्रों में बुरी तरह नाकाम रहा।
- इतिहास में पहली बार लोगों ने भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में भारी जनादेश दिया। यह जनादेश तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के अराजक शासन को खत्म करने के लिए था।
- पार्टी उस तरीके से नहीं चल रही थी, जैसे चलनी चाहिए। कई नेताओं को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं थी। कई-कई बार नेताओं की राय भी नहीं ली जाती थी।
- पार्टी के भीतर ऐसे हालात लंबे समय से चल रहे थे। कई नेताओं ने मजबूरी में इसे स्वीकार कर लिया था। ममता ने चुनाव हारने के बाद न आत्ममंथन किया, न कारण जानने की कोशिश की।
- सुखेंदु ने नई चुनी गई BJP सरकार की भी तारीफ की और कहा कि वे अपने घोषणापत्र के अनुसार राज्य के विकास के लिए कदम उठा रहे हैं। उसने पुनर्निर्माण के लिए पहल शुरू कर दी है।
बागी विधायक ऋतब्रत बोले- सुखेंदु की बात काफी हद तक सही
सुखेंदु शेखर के इस्तीफे पर बंगाल में TMC के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह सिर्फ सुखेंदु की निजी बात नहीं है। मैंने सुखेंदु से सीधे बात नहीं की है, लेकिन टीवी पर उनके बयान देखे और सुने हैं। मैं उनकी बातों से सहमत हूं। राज्यसभा के कामकाज को लेकर सुखेंदु की बात काफी हद तक सही है। संसद कोई क्विज खेलने की जगह नहीं है।
लोकसभा सांसद काकोली घोष भी पार्टी से इस्तीफा दे चुकीं

सुखेंदु से पहले 27 मई को बारासात से TMC सांसद काकोली घोष भी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं। हालांकि उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया है। प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजे लेटर में काकोली ने लिखा था कि मानसिक संघर्ष और लंबे चिंतन के बाद यह फैसला लिया है।
काकोली घोष का इस्तीफा उस बैठक के बाद आया था जिसमें वे पश्चिम बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में कल्याणी में शामिल हुई थीं।
इसके बाद भाजपा नेता सौमित्र खान ने दावा किया था कि अगर भाजपा चाहे तो अगले कुछ दिनों में TMC पूरी तरह खत्म हो सकती है।
28 साल पुरानी TMC में बगावत, 3 जून को अलग हुए 58 विधायक

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में 28 साल के इतिहास में पहली बार औपचारिक तौर पर टूट सामने आई है। बुधवार को 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी।
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