जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के विधि संकाय की ओर से सत्र 2026-27 के पंचवर्षीय एवं त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु परीक्षा आवेदन की अंतिम तिथि 23 जून, 2026 तक बढ़ाई गई है। संकाय अधिष्ठाता प्रो. सुनील आसोपा ने बताया कि 23 जून, 2026 के पश्च
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समितियों के समक्ष संपन्न हुई 126 विद्यार्थियों की नकल प्रकरण सुनवाई
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर की वर्ष 2026 की परीक्षाओं में नकल प्रकरणों के कारण जिन विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम रोके गए हैं। उनकी सुनवाई के लिए गठित समितियों की बैठक 20 जून, 2026 को प्रातः 11.30 बजे से विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय स्थित बृहस्पति भवन में संपन्न हुई। नकल प्रकरण सुनवाई के लिए गठित विभिन्न समितियों के समक्ष विभिन्न संकाय के 126 विद्यार्थियों की सुनवाई होनी थी जिसमें 23 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे। नकल प्रकरण सुनवाई में संकायवार अनुसार विज्ञान संकाय के 57, विधि एवं बी.एड.के 12, कला संकाय के 43 एवं वाणिज्य संकाय के 14 विद्यार्थियों की सुनवाई होनी थी, इनमें से 23 विद्यार्थी समितियों के समक्ष उपस्थित नहीं हुए।
कल मनाया जाएगा 12 वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
जोधपुर। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर में 21 जून, 2026 को 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन विश्वविद्यालय के ओल्ड कैम्पस स्थित क्रीड़ा मंडल परिसर में किया जाएगा। कार्यक्रम प्रातः 6.45 बजे भारत सरकार द्वारा निर्धारित योग प्रोटोकॉल के अनुसार आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों,कर्मचारियों तथा अशैक्षणिक स्टाफ एवं विद्यार्थी निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर सामूहिक योगाभ्यास में भाग लेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन एवं शारीरिक सुदृढ़ता का संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान निर्धारित योग प्रोटोकॉल के अनुसार विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया जाएगा। कार्यक्रम के समन्वयक शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.अमान सिंह सिसोदिया होंगे, जबकि कार्यक्रम का समग्र मार्गदर्शन क्रीड़ा मंडल के अध्यक्ष प्रो. आर.सी. मीणा द्वारा किया जाएगा।

बैठक में मौजूद एसोसिएश के पदाधिकारी।
केमिकल ग्रेड लाइमस्टोन नीति बदलाव की उठी मांग पश्चिमी राजस्थान के नागौर, जोधपुर और पाली जिलों में दशकों से संचालित लघु एवं मध्यम (MSME) आधारित चूना उद्योग अब गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे हैं। ऑल इंडिया लाइम मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते नीति में बदलाव नहीं किया तो क्षेत्र के सैकड़ों चूना उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे और लाखों लोगों के रोजगार पर असर पड़ेगा। बैठक में एसोसिएशन अध्यक्ष मेघराज लोहिया ने कहा कि देश में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले केमिकल ग्रेड लाइमस्टोन का 90 प्रतिशत से अधिक भंडार राजस्थान के नागौर, जोधपुर और पाली क्षेत्र में स्थित है। इसी खनिज के आधार पर यहां सैकड़ों इकाइयां क्विकलाइम और हाईड्रेटेड लाइम का उत्पादन कर देश की स्टील, शक्कर, जिंक, एल्युमिनियम, पेपर, फार्मा, वाटर ट्रीटमेंट, सड़क निर्माण, ग्लास, कृषि तथा अन्य आधारभूत औद्योगिक इकाइयों की मांग पूरी कर रही हैं। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्ष 2015-16 में लाइमस्टोन को मेजर मिनरल और नोटिफाइड मिनरल की श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद छोटे खनन पट्टों का आवंटन लगभग बंद हो गया। इसका सीधा असर स्थानीय चूना उद्योगों पर पड़ा और कच्चे माल की उपलब्धता लगातार घटती चली गई। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि नई नीति के तहत बड़े-बड़े लाइमस्टोन ब्लॉक बनाकर उन्हें सीमेंट कंपनियों को आवंटित किया जा रहा है, जबकि केमिकल ग्रेड लाइमस्टोन की आवश्यकता मुख्य रूप से चूना और रासायनिक उद्योगों में होती है। उद्योगपतियों का कहना है कि सीमेंट निर्माण के लिए देश के कई राज्यों में सामान्य ग्रेड का लाइमस्टोन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, ऐसे में उच्च गुणवत्ता वाले खनिज का उपयोग सीमेंट उत्पादन में करना संसाधनों का अनुचित इस्तेमाल है।
एसोसिएशन ने याद दिलाया कि वर्ष 2018 में यह मुद्दा नीति आयोग और खान मंत्रालय के समक्ष उठाया गया था। उस दौरान नीति आयोग की बैठक में सुझाव दिया गया था कि केमिकल ग्रेड लाइमस्टोन को माइनर मिनरल घोषित कर छोटे उद्योगों के लिए इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जबकि सीमेंट ग्रेड लाइमस्टोन को अलग श्रेणी में रखा जाए। इसमें अध्यक्ष मेघराज लोहिया, महासचिव महेंद्र पित्ती, राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत और उद्योगपत्ति राहुल सिंघवी उपस्थित रहे।