9 घंटे पहले
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पंचतंत्र की एक चर्चित कथा है, पुराने समय में एक वन में एक मंदिर बन रहा था। मंदिर में लकड़ी का काम अधिक होने से कई बढ़ई दिन-रात काम कर रहे थे। परिसर में जगह-जगह लकड़ी के बड़े-बड़े लट्ठे, आरी और अन्य औजार रखे थे। दोपहर के भोजन के समय सभी मजदूर एक घंटे के लिए शहर चले जाते थे। एक दिन भोजन के लिए जाने से पहले एक मजदूर ने एक बड़े लट्ठे को आधा चीरकर उसके बीच में लोहे का कीला फंसा दिया, ताकि लौटने पर उसी जगह से आरी आसानी से चल सके।
मजदूरों के जाते ही बंदरों का एक झुंड वहां आ पहुंच गया। वे इधर-उधर उछल-कूद करने लगे। उनके साथ एक बेहद शरारती बंदर भी था, जिसकी आदत हर चीज को बिगाड़ने की थी। बंदरों का सरदार बूढ़ा और अनुभवी था। उसने सभी को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी औजार से या किसी भी चीज से यहां कोई छेड़छाड़ न करें। सभी बंदर पेड़ों की ओर चले गए, लेकिन वह शरारती बंदर चुपके से उसी जगह रुक गया।
उछल-कूद करते समय शरारती बंदर की नजर आधे चिरे हुए लट्ठे पर पड़ी। पहले उसने पास रखी आरी उठाई और लकड़ी पर चलाने की कोशिश की। आरी से तेज आवाज निकली तो उसने झुंझलाकर उसे फेंक दिया। अब उसकी उत्सुकता लट्ठे के बीच फंसे कीले पर टिक गई। वह सोचने लगा कि अगर इस कीले को बाहर निकाल दिया जाए तो क्या होगा।
अब उस बंदर ने पूरी ताकत से कीले को हिलाना शुरू किया। काफी कोशिश के बाद कीला धीरे-धीरे खिसकने लगा। किले को हिलता देखकर उस बंदर को अपनी सफलता पर अहंकार होने लगा, उसने और जोर लगाया, लेकिन उसे पता ही नहीं चला कि उसकी पीठ के पीछे उसकी पूंछ लट्ठे के दो हिस्सों के बीच में आ गई है।
बंदर ने पूरी ताकत लगाकर एक जोरदार झटका दिया और कीला बाहर निकल गया, लट्ठे के दोनों हिस्से तेजी से आपस में बंद हो गए और उस बंदर की पूंछ बीच में ही फंस गई। अब वह दर्द से वह जोर-जोर से चीखने लगा।
उसी समय मजदूर वापस लौट आए। उन्हें देखकर बंदर डर गया और भागने की कोशिश करने लगा। उसने पूरी ताकत लगाई, जिससे उसकी पूंछ टूट गई। वह दर्द और पछतावे के साथ वहां से भाग निकला।
कहानी की सीख
- जिज्ञासा अच्छी बात है, लेकिन विवेक के साथ काम करें – नई चीजें सीखने की इच्छा सकारात्मक बात है, लेकिन बिना ज्ञान और तैयारी के काम करना जोखिम भरा हो सकता है। पहले समझें, फिर आगे कदम उठाएं।
- अनुभवी लोगों की सलाह को नजरअंदाज न करें – बंदरों के सरदार ने पहले ही चेतावनी दे दी थी, लेकिन शरारती बंदर नहीं माना और अंत में उसे पछताना पड़ा। हमें भी अपने माता-पिता, गुरु, वरिष्ठ और अनुभवी लोगों की सलाह पर ध्यान देना चाहिए, अच्छी सलाह हमें बड़ी समस्याओं से बचा सकती है।
- बिना सोच-विचार कोई काम न करें – उत्साह में आकर बिना सोच-विचार किए लिया गया निर्णय नुकसान दे सकता है। महत्वपूर्ण काम हमेशा सोच-समझकर ही करना चाहिए।
- अपनी सीमाओं को पहचानें – हर व्यक्ति हर काम का विशेषज्ञ नहीं होता। जिस विषय का ज्ञान न हो, उसमें अनावश्यक हस्तक्षेप करने से बचना ही बुद्धिमानी है। नया काम में बिना सावधानी आगे नहीं बढ़ना चाहिए।
- छोटी सी गलती भी बड़ा नुकसान बन सकती है – बंदर ने केवल एक कीला निकालने की कोशिश की थी, लेकिन उसकी कीमत अपनी पूंछ गंवाकर चुकानी पड़ी। जीवन में कभी-कभी छोटी सी लापरवाही बड़ा नुकसान कर सकती है, इसलिए सतर्कता जरूरी है।
- आत्मसंयम सफलता की कुंजी है – हर इच्छा को तुरंत पूरा करना जरूरी नहीं है। कई बार स्वयं को रोक लेना लाभदायक होता है। अपनी इच्छा को समझें और परिस्थिति के अनुसार उसे पूरा करने के बारे में सोच-विचार करें।
- दूसरों के कार्य और संसाधनों से छेड़छाड़ न करें – जो चीज हमारी नहीं है या जिसका इस्तेमाल हमें नहीं मालूम है, उससे छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। ऐसी छेड़छाड़ बड़ा नुकसान कर सकती है। सफल जीवन केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने, अपनी सीमाएं समझने और अनावश्यक कामों से बचने की कला से बनता है। जो व्यक्ति विवेक, धैर्य और आत्मसंयम अपनाता है, वही जीवन की बड़ी परेशानियों से बचकर आगे बढ़ता है।
