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प्रयागराज के 24 साल पुराने गढ़वा किला बुद्ध प्रतिमा चोरी और चौकीदार हत्याकांड में सीबीआई ने आखिरकार आखिरी फरार आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है। फतेहपुर के खखरेरू थाना क्षेत्र के नसीरपुर गांव से सीबीआई ने रामनारायण उर्फ हैदर को पकड़ा। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले के सभी फरार आरोपी कानून के शिकंजे में आ गए हैं। 21 अप्रैल की रात का मामला
यह वारदात 21-22 अप्रैल 2002 की रात शंकरगढ़ स्थित एएसआई के संरक्षित गढ़वा किले में हुई थी। आरोप है कि विजय कुमार शुक्ला की अगुवाई में 11 बदमाश किले में घुसे। सबसे पहले वहां तैनात चौकीदार विनोद कुमार श्रीवास्तव की बेरहमी से हत्या कर दी गई। दूसरे चौकीदार को बंधक बनाकर स्टोर रूम का ताला तोड़ा गया और वहां रखी भगवान बुद्ध की प्राचीन पत्थर की प्रतिमा उठा ले गए। प्रतिमा निकालते समय वह दो टुकड़ों में टूट गई थी। दिल्ली भेज दिए थे मूर्ति के टुकड़े
सीबीआई जांच में सामने आया कि प्रतिमा के दोनों हिस्सों को वाहन से दिल्ली ले जाया गया। आरोप है कि मुख्य आरोपी विजय कुमार शुक्ला ने इसे 2.20 लाख रुपये में बेच दिया। बाद में प्रतिमा को महिपालपुर के एक गोदाम में रखा गया और फिर विदेश भेज दिया गया। 2003 में सीबीआई को सौंपी गई थी जांच
मामला पहले शंकरगढ़ थाने में दर्ज हुआ था, लेकिन 9 सितंबर 2003 को इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। करीब दो साल की जांच के बाद 22 दिसंबर 2005 को सीबीआई ने 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इनमें विजय कुमार शुक्ला, रविकरण, सूरजभान और रामनारायण उर्फ हैदर फरार चल रहे थे।
फरार आरोपियों की तलाश के लिए सीबीआई ने अलग-अलग टीमें बनाईं और लगातार निगरानी के साथ मुखबिर तंत्र को सक्रिय रखा। इसी अभियान में सूरजभान 22 मई 2026 और रविकरण 2 जून 2026 को गिरफ्तार किए गए। मुख्य आरोपी विजय कुमार शुक्ला पहले से चित्रकूट जिला जेल में एक दूसरे मामले में बंद मिला। आखिरी मुल्जिम था रामनारायण
अब रामनारायण उर्फ हैदर की गिरफ्तारी के बाद इस चर्चित मामले का कोई भी आरोपी फरार नहीं बचा है। सीबीआई का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ अब अदालत में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
गढ़वा किला कांड का मुल्जिम 24 साल बाद गिरफ्तार:CBI ने फतेहपुर में पकड़ा, 2002 में प्रयागराज के शंकरगढ़ में हुई थी वारदात
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