मुजफ्फरनगर नगर पालिका में 11 गांव शामिल नहीं:हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, कहा सतही आरोपों का मामला

Actionpunjab
2 Min Read




इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद में 11 और गांवों को शामिल करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने यह आदेश मोहम्मद खालिद की जनहित याचिका पर पारित किया। बताया गया कि वर्ष 2008 में नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर ने 22 गांवों को अपनी सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया था। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद 29 सितंबर 2022 को अधिसूचना जारी हुई, जिसमें केवल 11 गांव ही शामिल किए गए। याचिका में क्या कहा जानिये याचिकाकर्ता का कहना था कि शेष 11 गांवों को बाहर रखने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया, और 27 अप्रैल 2026 को इस संबंध में एक प्रतिवेदन राज्य सरकार को दिया गया था, जिसके निस्तारण की मांग करते हुए याचिका दायर की गई। कोर्ट ने कहा कि यू.पी. म्युनिसिपलिटीज एक्ट, 1916 की धारा 3 और 4 तथा संविधान के अनुच्छेद 243क्यू के तहत आवश्यक प्रक्रिया अपनाने के बाद ही अधिसूचना जारी की गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने बिना यह जांचे कि अधिसूचना जारी करने से पहले उचित प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं, सतही आरोपों के आधार पर याचिका दायर कर दी। कोर्ट ने आगे कहा कि अधिसूचना 29 सितंबर 2022 को जारी हुई थी, लेकिन याचिकाकर्ता ने चार साल से अधिक समय तक यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया, इसका कोई ठोस कारण याचिका में नहीं दिया गया, सिवाय इस मौखिक दावे के कि मामला उठाया जा रहा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब राज्य सरकार ने अधिनियम के प्रावधानों के तहत उचित प्रक्रिया अपनाकर अधिसूचना जारी कर दी है, तो जनहित याचिका के माध्यम से 11 और गांवों को शामिल करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *