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- Farmers Puja Tools On Hal Harini Amavasya 14th July, Rituals About Halharini Amawasya In Hindi, Traditions About Amawasya
15 घंटे पहले
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मंगलवार, 14 जुलाई को आषाढ़ मास की अमावस्या है। इसे हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। इसलिए यह पर्व किसानों के लिए बहुत खास है, क्योंकि इस दिन किसान अपने हल और अन्य कृषि उपकरणों (टूल्स) की पूजा करते हैं। पूजा के बाद नई फसल से जुड़े कामों की औपचारिक शुरुआत हो जाती है। कई किसान हल से खेत जोतने और बीज बोने की परंपरा भी निभाते हैं। अभी वर्षा ऋतु का समय है, इस ऋतु में आने वाली आषाढ़ी अमावस्या का दिन बीज बोने के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, आषाढ़ी अमावस्या पर पितरों के लिए पूजा-पाठ, ध्यान, पिंडदान और तर्पण आदि शुभ करना चाहिए। साथ ही, किसी सार्वजनिक जगह पर एक छायादार वृक्ष का पौधा भी लगाना चाहिए और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए। इस समय लगाए गए पौधों के पनपने की संभावनाएं काफी अधिक हैं, क्योंकि पौधों को बारिश की वजह से करीब 3-4 महीनों तक समय-समय पर जरूरी पानी मिल जाता है।
हलहारिणी अमावस्या पर कर सकते हैं ये शुभ काम
- अमावस्या तिथि पर सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान के बाद सबसे पहले सूर्यदेव को जल चढ़ाना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें। जल में कुमकुम, लाल फूल, चावल डालें। ऊँ सूर्याय नमः मंत्र का जप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य चढ़ाएं।
- सूर्य पूजा के बाद घर के मंदिर में भगवान गणेश, शिवजी, विष्णु जी, देवी पार्वती, श्रीकृष्ण आदि की विधिवत पूजा करें। जो लोग इस तिथि पर व्रत करते हैं, वे पूजा में व्रत करने का संकल्प करें। इसके बाद दिनभर उपवास करें। जो लोग निराहार यानी भूखे नहीं रह पाते हैं, वे एक समय फलाहार कर सकते हैं।
- इस तिथि पर पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म खासतौर पर करें। दोपहर में करीब 12 बजे पितरों की शांति के लिए तर्पण, धूप-ध्यान और श्राद्ध करें। गाय के गोबर से बने कंडों को जलाएं और उन पर गुड़-घी अर्पित करें। हथेली में जल लेकर अंगूठे की दिशा से पितरों को अर्पण करें।
- मान्यता है कि जो भक्त अमावस्या तिथि पर गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, उनके जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल नष्ट हो जाते हैं। इसलिए अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें। नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान करते समय सभी तीर्थों का ध्यान करना चाहिए।
- मंगलवार और अमावस्या के योग में हनुमान जी का पूजन करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं। हनुमान चालीसा का पाठ करें। चाहें तो राम नाम जप या सुंदरकांड पाठ भी कर सकते हैं।
- जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा जरूर दें। जूते-चप्पल, अनाज, धन या भोजन का दान करें। अमावस्या की शाम को घर के आंगन में तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और उसकी परिक्रमा करें।
