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राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा- कानूनी तौर पर गोद लिया गया बेटा (दत्तक पुत्र) भी अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने का हकदार है। साथ ही कोर्ट ने बिना किसी ठोस कारण के याचिकाकर्ता के दावे को खारिज करने पर सरकार और पुलिस विभाग पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जस्टिस गणेशराम मीणा की अदालत ने यह आदेश टोंक निवासी अश्विनी गुर्जर की याचिका को मंजूर करते हुए दिया। कोर्ट ने सरकार को कहा- वह जुर्माना राशि 60 दिन में याचिकाकर्ता को भुगतान करें। अदालत ने माना कि पिता की मौत के बाद याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों के कारण कठिनाई झेलनी पड़ी। वहीं पुलिस विभाग ने प्रार्थी का दावा खारिज करने का कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया। ऐसे में अधिकारियों पर जुर्माना लगाना उचित होगा। अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर फिर से विचार करें याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता के पिता पुलिस विभाग में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर कार्यरत थे। नौकरी के दौरान 27 जनवरी 2022 को उनकी मृत्यु हो गई थी। याचिकाकर्ता मृतक का विधिक रूप से गोद लिया हुआ बेटा है। उसने पिता की जगह अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन पुलिस विभाग ने 2 मार्च 2023 को बिना कोई ठोस कारण बताए उसका दावा खारिज कर दिया। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि प्रार्थी के अनुकम्पा नियुक्ति दावे पर फिर से विचार करें। साथ ही यदि वह सभी जरूरी शर्तें पूरी करे तो उसे अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
हाईकोर्ट ने कहा- दत्तक पुत्र भी अनुकंपा नियुक्ति का हकदार:पुलिस विभाग पर लगाया 1 लाख का जुर्माना; कहा- नियमों के तहत नियुक्ति देने पर करें फिर विचार
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