4% ब्याज, ₹3 लाख तक लोन; इस स्कीम पर किसान फिदा, आर्थिक सर्वे में भी जिक्र, Budget Hindi News

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Economic Survey 2025: आम बजट पेश होने से एक दिन पहले यानी 31 जनवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वे 2024-25 को सदन के पटल पर रखा है। इसे पेश करते हुए वित्त मंत्री ने उन योजनाओं का जिक्र किया जिसके जरिए करोड़ों किसानों को फायदा मिल रहा है। इनमें से एक संशोधित ब्‍याज सहायता योजना (MISS) भी है।

आर्थिक सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 से संशोधित ब्‍याज सहायता योजना के अंतर्गत दावों और भुगतान करने में तेजी लाने के लिए जरूरी प्रक्रिया किसान ऋण पोर्टल (केआरपी) के माध्‍यम से पूरी की जा रही है। 31 दिसंबर 2024 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के दावों का निपटान किया जा चुका था। वर्तमान में संशोधित ब्‍याज सहायता योजना-किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत किसान ऋण पोर्टल की सहायता से लगभग 5.9 करोड़ किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

योजना के बारे में

यह योजना किसानों को फसल और संबद्ध गतिविधियों के लिए रियायती शॉर्ट टर्म एग्री लोन प्रोवाइड करती है। इसके तहत 3 लाख रुपये तक के लोन पर 7% ब्याज है। वहीं, समय पर री-पेमेंट के लिए अतिरिक्त 3% अनुदान के साथ प्रभावी दर को घटाकर 4% कर दी जाती है।

क्या कहा वित्त मंत्री ने

निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वे पेश करते हुए कहा कि सभी किसानों विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों तथा समाज के वंचित वर्गों को उपलब्‍ध कराई जा रही ऋण सहायता से किसान लाभान्वित हो रहे हैं। इससे किसानों की आमदनी और कृषि की उत्‍पादकता को बढ़ाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

कितने क्रेडिट कार्ड

आर्थिक सर्वे के अनुसार मार्च 2024 तक देश में 7 करोड़ 75 लाख किसान क्रेडिट कार्ड खाते संचालित हो रहे हैं और इन पर 9.81 लाख करोड़ रुपये का ऋण अधिशेष है। 31 मार्च 2024 तक मत्‍स्‍य पालन कार्यों के लिए एक लाख 24 हजार किसान क्रेडिट कार्ड और पशु पालन गतिविधियों के लिए 44 लाख 40 हजार किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए थे।

सर्वे के मुताबिक केंद्र सरकार की योजनाएं जैसे पीएम-किसान सम्मान निधि और किसानों को पेंशन की सुविधा प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना का भी किसानों को बड़ा फायदा हुआ है। पीएम-किसान योजना के अंतर्गत 11 करोड़ से अधिक किसानों ने लाभ उठाया है और प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अंतर्गत 23 लाख 61 हजार किसानों ने स्‍वयं का नामांकन कराया है।

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