NTA Reforms: पूर्व यूजीसी चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने कहा कि एनटीए को पूरी तरह बदलने के बजाय उसकी व्यवस्था में सुधार और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल जरूरी है।
देश में NEET-UG और UGC-NET जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के बाद एनटीए में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। एनटीए से 600 सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स और 50 से अधिक स्टाफ सदस्यों को हटाए जाने के बीच यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष और NEP 2020 की समीक्षा समिति के अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का बड़ा बयान सामने आया है।
पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में प्रो. कुमार ने स्पष्ट कहा कि एनटीए को पूरी तरह से बदलने या उसकी जगह नई एजेंसी लाना कोई सही समाधान नहीं है। एजेंसी को पूरी तरह बदलने या हटाने के बजाय इसके काम करने के तरीकों में सुधार करने की आवश्यकता है।
सालाना 1 करोड़ से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा की चुनौती
पूर्व यूजीसी चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि एनटीए हर साल लगभग 1 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करता है। इतने बड़े पैमाने पर होने वाली परीक्षाओं में पेपर लीक या गड़बड़ियों की घटनाओं को केवल एक चरण की नाकामी नहीं माना जा सकता।
उन्होंने इसे शुरू से अंत तक परीक्षा-सुरक्षा की चुनौती के रूप में देखने पर जोर दिया। इसके तहत सवाल तैयार करने, उनका अनुवाद, डिजिटल स्टोरेज, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और एग्जाम सेंटर पर सुरक्षा के प्रत्येक स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए।
सुरक्षा मजबूत करने के लिए 3 मुख्य सुधार बिंदु
प्रो. एम. जगदीश कुमार ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए तीन मुख्य प्राथमिकताओं को बताया है:
डिजिटल ट्रैसबिलिटी और एक्सेस कंट्रोल: प्रश्नपत्रों से जुड़ी गोपनीय सामग्री को संभालने वाले लोगों की संख्या कम रखी जाए और हर कदम पर डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज हो।
स्थायी विशेषज्ञ टीम: साइबर सुरक्षा, प्रश्नपत्र निर्माण, भाषा विशेषज्ञता और डेटा मैनेजमेंट के लिए स्थायी विशेषज्ञ टीम तैयार की जाए।
विश्वसनीय परीक्षा केंद्रों का विकास: परीक्षा केंद्रों के रूप में प्रतिष्ठित सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जाए, जहां सीसीटीवी और बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन की पुख्ता व्यवस्था हो।
राधाकृष्णन कमेटी और पार्टनरशिप मॉडल
प्रो. कुमार ने बताया कि राधाकृष्णन समिति ने एनटीए के बोझ को कम करने के लिए एक ‘पार्टनरशिप मॉडल’ का सुझाव दिया था। इसके तहत परीक्षा आयोजित करने वाला संबंधित मंत्रालय या संस्थान सिलेबस, प्रश्नों की गुणवत्ता और एक्सपर्ट्स की जिम्मेदारी संभालेगा, जबकि एनटीए केवल सुरक्षित प्लेटफॉर्म, परीक्षा सेंटर, अभ्यर्थी सत्यापन और रिजल्ट प्रोसेसिंग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग कई नई परीक्षाएं आयोजित करने वाली एजेंसियां बनाने से सरकार का खर्च बढ़ेगा और सुरक्षा मानकों में असमानता आ सकती है।
छात्रों का भरोसा जीतना प्राथमिक लक्ष्य
प्रो. एम. जगदीश कुमार के अनुसार, हाल ही में 600 एक्सपर्ट्स को हटाकर नए विषय विशेषज्ञों को जोड़ना एक सही और अच्छा कदम है। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल ट्रेसेबिलिटी के जरिए सुरक्षा को इतना पुख्ता बनाया जाना चाहिए कि सेंध लगाना नामुमकिन हो जाए, जिससे देश के अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।