हिमाचल में भारी बारिश से मणिमहेश यात्रा स्थगित, इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट, Himachal-pradesh Hindi News

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हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण 149 सड़कें बंद हो गई हैं। रास्ता खराब होने से श्री मणिमहेश यात्रा 25 अगस्त तक स्थगित कर दी गई है। चंबा, कांगड़ा और मंडी में भारी बारिश का अलर्ट है।

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भारी बारिश के कारण विख्यात श्री मणिमहेश यात्रा को 25 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया है। चंबा जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया है। यात्रा मार्ग पर तोस के गोठ के पास बारिश से रास्ता खराब हो गया है। इस हिस्से की मरम्मत का काम जारी है। उपायुक्त मुकेश रेप्सवाल ने श्रद्धालुओं से 25 अगस्त तक यात्रा मार्ग पर जाने से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

इन जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

IMD ने अगले 24 घंटे के दौरान हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों के विभिन्न हिस्सों में गरज चमक के साथ भारी से ज्यादा भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं उना, बिलासपुर, हमीरपुर, कुल्लू और शिमला जिलों के अलग-अलग हिस्सों में गरज चमक के साथ जोरदार बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

अगले 6 दिन तक कैसा रहेगा मॉनसून?

इस बीच हिमाचल प्रदेश में अगले 6 दिन तक मॉनसून के सामान्य रहने की संभावना है। IMD ने 24 से 29 अगस्त तक हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान जताया है, लेकिन इस अवधि में भारी, बहुत भारी या अत्यधिक भारी बारिश को लेकर किसी तरह का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में बादलों के बरसने के आसार तो हैं, लेकिन फिलहाल मौसम के बड़े खतरे की आशंका नहीं है।

भूस्खलन के कारण 149 सड़कें रहीं बंद

मौसम विभाग के अनुसार; 24 अगस्त को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। 25 से 27 अगस्त तक अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जबकि 28 और 29 अगस्त को भी छिटपुट बारिश हो सकती है। इस बीच बीती रात और आज सुबह हुई भारी बारिश से हिमाचल प्रदेश में जनजीवन प्रभावित हुआ है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार दोपहर तक भूस्खलन के कारण 149 सड़कें बंद थीं।

1,121 करोड़ रुपये का नुकसान

इनमें मंडी की 86, कुल्लू की 31, शिमला की 10 तथा चंबा और कांगड़ा की आठ-आठ सड़कें शामिल हैं। मंडी में पिछले 24 घंटों में 111.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कांगड़ा में 89 और सुंदरनगर में 71 मिलीमीटर बारिश हुई। बारिश से 60 बिजली ट्रांसफार्मर और 35 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हैं। राज्य में 30 जून से शुरू हुए मानसून सीजन में बारिश से जुड़े हादसों में अब तक 224 लोगों की मौत हुई है और करीब 1,121 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन है।

26 अगस्त से यात्रा शुरू करने की तैयारी

उपायुक्त ने बताया कि मौसम और यात्रा मार्ग की स्थिति अनुकूल रहने पर 26 अगस्त से मणिमहेश यात्रा फिर शुरू की जाएगी। संबंधित विभागों को रास्ते की स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर फिसलन, भूस्खलन और रास्ता खराब होने का खतरा बना रहता है।

मार्ग पर नहीं जाने की अपील

इसी को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से यात्रा स्थगित रहने की अवधि में मार्ग पर नहीं जाने का आग्रह किया है। मणिमहेश की ओर श्रद्धालुओं की अनौपचारिक आवाजाही आधिकारिक यात्रा से पहले शुरू हो जाती है। इस साल आधिकारिक यात्रा 4 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक होगी।

पंजीकरण जरूरी, हड़सर में होगी मेडिकल जांच

आधिकारिक यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पंजीकरण अनिवार्य है। यात्रा के दौरान पंजीकरण रसीद का प्रिंटआउट साथ रखना होगा। एक मोबाइल नंबर से अधिकतम पांच लोगों के लिए एक आवेदन किया जा सकता है। भरमौर क्षेत्र में बीएसएनएल, जियो और एयरटेल की सेवाएं उपलब्ध हैं, हालांकि कई जगह नेटवर्क कमजोर हो सकता है।

रजिस्ट्रेशन की सलाह

इंटरनेट की धीमी गति या ओटीपी नहीं मिलने की समस्या से बचने के लिए श्रद्धालुओं को भरमौर पहुंचने से पहले पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। हड़सर बेस कैंप में मेडिकल जांच होगी और अस्वस्थ पाए जाने वाले व्यक्ति को यात्रा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 75 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति के अस्वस्थ पाए जाने पर भी उन्हें यात्रा की अनुमति नहीं होगी।

भरमौर से 21 किलोमीटर दूर है मणिमहेश झील

मणिमहेश झील चंबा जिले की बुद्धिल घाटी में भरमौर से करीब 21 किलोमीटर दूर लगभग 13 हज़ार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसके ऊपर कैलाश पर्वत की चोटी है, जिसकी ऊंचाई करीब 18,564 फीट बताई जाती है। भगवान शिव को इस तीर्थ का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। हड़सर से मणिमहेश तक जाने वाले मार्ग में धनछो प्रमुख पड़ाव है, जहां श्रद्धालु आमतौर पर ठहरते हैं। झील से करीब एक किलोमीटर पहले गौरी कुंड और शिव क्रोत्री स्थित हैं, जिनका धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु यहां स्नान के बाद मणिमहेश झील की ओर जाते हैं।

रिपोर्ट- यूके शर्मा

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