हिमाचल प्रदेश जल्द ही एक बार फिर तेज बारिश का दौरा शुरू होने वाला है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में कई जगहों पर 31 अगस्त से 3 सितंबर 4 दिन घनघोर बारिश होने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर बीते 24 घंटे में भी बारिश हुई है।
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से धीमी पड़ी मॉनसून की रफ्तार के बीच मौसम विभाग ने एक बार फिर बारिश का दौर तेज होने का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार 31 अगस्त से 3 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 31 अगस्त को भारी बारिश कुछ स्थानों पर होने की संभावना है, जबकि 1 से 3 सितंबर तक भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से मॉनसून की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहीं। पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ ही क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई। धर्मशाला में सबसे अधिक 73.2 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके अलावा गुलेर में 29, कांगड़ा में 22.8, नैना देवी में 12.8, जोगिंदरनगर में 11 और नगरोटा सूरियां में 8.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कांगड़ा में गरज के साथ बिजली चमकने की भी घटना दर्ज हुई।
मैदानी इलाकों में उमस बढ़ी
शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में शनिवार सुबह से आसमान में बादल छाए हुए हैं। वहीं मैदानी इलाकों में बारिश कम होने या नहीं होने से उमस बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में मॉनसून की गति धीमी रही है और ज्यादातर इलाकों में मौसम बादलों और हल्की बारिश तक सीमित रहा है।
हिमाचल में 30 जून को आया था मॉनसून
मौसम विभाग के अनुसार इस मॉनसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई है। मॉनसून ने इस साल 30 जून को हिमाचल में दस्तक दी थी और आमतौर पर सितंबर के अंत तक इसके प्रदेश से विदा होने की प्रक्रिया पूरी होती है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बारिश को मॉनसून की आगे की गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सड़कें अवरुद्ध, बिजली ट्रांसफार्मर ठप
बारिश में कमी के बावजूद प्रदेश में मॉनसून से जुड़ी परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण सड़कें अभी भी बंद हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार शनिवार सुबह तक प्रदेश में भूस्खलन से 68 सड़कें अवरुद्ध थीं और सात बिजली ट्रांसफार्मर ठप रहे। हालांकि किसी भी पेयजल योजना के प्रभावित होने की सूचना नहीं है। सड़क बंद होने के मामलों में मंडी सबसे आगे है, जहां 28 सड़कें अवरुद्ध हैं। कुल्लू में 16, कांगड़ा में सात, सिरमौर में छह, ऊना में चार, चंबा में तीन, शिमला में दो तथा बिलासपुर और लाहौल-स्पीति में एक-एक सड़क बंद है। बिजली आपूर्ति के मोर्चे पर सिरमौर के नाहन में पांच तथा कुल्लू के बंजार और चंबा में एक-एक ट्रांसफार्मर ठप है।
अब तक करीब 250 लोगों की मौत
इस मॉनसून सीजन में बारिश और इससे जुड़े हादसों में अब तक 249 लोगों की मौत और 401 लोग घायल हो चुके हैं। 450 मवेशियों की भी जान गई है। बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से 97 घर पूरी तरह ध्वस्त हुए हैं, जबकि 432 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 17 दुकानें और 380 पशुशालाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।
सरकार के आकलन के अनुसार मॉनसून से प्रदेश में अब तक 1,183 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा लोक निर्माण विभाग का है। सड़कों और पुलों को हुए नुकसान से लोक निर्माण विभाग को करीब 897 करोड़ रुपये की क्षति आंकी गई है।
रिपोर्ट : यूके शर्मा