Supreme Court Slams Allahabad HC for 27 Adjournments, Grants Bail to Accused | हाईकोर्ट में 27 बार सुनवाई टली, सुप्रीम कोर्ट से जमानत: इलाहाबाद हाईकोर्ट को फटकार- केस इतनी बार क्यों टाला, यह निजी आजादी का मामला

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से एक व्यक्ति की जमानत याचिका 27 बार टाले जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नाराजगी जताई। यह मामला ठगी केस से जुड़ा है, जिसकी जांच CBI कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन माना और आरोपी लक्ष्य तंवर को जमानत दे दी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा;-

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जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल हो और वह चार साल से जेल में हो, तो कोर्ट को याचिका लटकाकर नहीं रखनी चाहिए।

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दरअसल, लक्ष्य पर IPC की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश शामिल हैं। इसके अलावा, एंटी करप्शन लॉ की धाराएं 13(1)(d) और 13(2) भी उन पर लगाई गई हैं।

आरोपी लक्ष्य लगभग 4 साल से जेल में है

याचिकाकर्ता लक्ष्य तंवर के वकील राजा चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनका क्लाइंट तीन साल, आठ महीने और 24 दिन से जेल में हैं। इतना ही नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज के दिन (22 मई) भी सुनवाई होनी थी।

20 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई टाल दी थी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 मार्च को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी थी और ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह जल्द से जल्द मुकदमे की कार्यवाही पूरी करे, फिर जमानत याचिका पर दोबारा विचार होगा।

हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज 33 मामलों का हवाला देते हुए सख्त रुख अपनाया था। साथ ही CBI को निर्देश दिया था कि शिकायतकर्ता संजय कुमार यादव की गवाही उसी दिन कराई जाए और उसकी जिरह भी पूरी की जाए, ताकि देरी न हो।

CBI ने जमानत याचिका का विरोध किया CBI की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी पर 33 मामलों में आरोप हैं। इस पर वकील राजा चौधरी ने जवाब दिया कि इनमें से 27 मामले गिरफ्तारी के बाद दर्ज हुए और इनमें भी उन्हें जमानत मिल चुकी है।

जब कोर्ट ने पूछा कि अब तक कितने गवाहों की गवाही हो चुकी है तो चौधरी ने बताया कि कुल 365 गवाहों में से सिर्फ 3 की गवाही हुई है।

जस्टिस गवई ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि वह चार साल से जेल में है, हाईकोर्ट 27 बार सुनवाई टाल चुका है, तो 28वीं बार क्या उम्मीद की जा सकती है?

अब पढ़िए अदालतों में कितने पेंडिंग केस हैं…

सुप्रीम कोर्ट में 83 हजार केस पेंडिंग, अब तक की सबसे बड़ी संख्या देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में 82,831 केस पेंडिंग हैं। यह अब तक पेंडिंग केसों की सबसे बड़ी संख्या है। अकेले 27,604 पेंडिंग केस पिछले एक साल के अंदर दर्ज हुए हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में 2024 में 38,995 नए केस दर्ज किए गए। इनमें से 37,158 केसों का निपटारा हुआ। पिछले 10 साल में 8 बार पेंडिंग केस की संख्या बढ़ी है। 2015 और 2017 में पेंडिंग केस कम हुए।

वहीं, हाईकोर्ट में 2014 में कुल 41 लाख पेंडिंग केस थे, जो बढ़कर अब 59 लाख पहुंच गए हैं। पिछले 10 सालों में केवल एक बार पेंडिंग केस कम हुए। देश के सभी कोर्ट्स (सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, डिस्ट्रिक्ट समेत अन्य कोर्ट) में 5 करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं।

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‘संविधान में न्यायपालिका राज्य का तीसरा अंग है। इस तीसरे अंग के सामने सिविल और आपराधिक मुकदमों का अंबार है। इसलिए अदालतों का आधारभूत ढांचा मजबूत करना आवश्यक है, जिसके लिए बजट में जरूरी फंड की व्यवस्था करने पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।’

इस टिप्पणी के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी सरकार से नई अदालतों की स्थापना को लेकर जवाब मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…

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