मीरी-पीरी संस्थान और SGPC के सेक्रेटरी सुखमिंद्र सिंह।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे-44 पर बने मीरी-पीरी मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (शाहाबाद) को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) आमने-सामने हो गए। दोनों कमेटिय
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स्टे ऑर्डर को नहीं मान रही दूसरी कमेटी उधर, SGPC के सेक्रेटरी सुखमिंदर सिंह ने HSGMC के दावे को खारिज किया। मीरी-पीरी ट्रस्ट उनकी कमेटी के अधीन है। 2009 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इसे स्वतंत्र संस्थान घोषित किया था। पिछले साल हाईकोर्ट ने HSGMC को किसी भी दावे से रोक दिया था। बार-बार बयान देना कोर्ट की अवमानना है।
100 करोड़ खर्च करेगी SGPC सुखमिंदर सिंह ने दावा किया कि 2026 तक SGPC मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी में है। इस दौरान कॉलेज में निर्माण, डॉक्टरों की नियुक्ति और जरूरी काम किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट पर 100 करोड़ का बजट खर्च होगा, जबकि HSGMC का सालाना बजट ही 60 करोड़ रुपए है।

HSGMC के प्रधान झींडा ने 2 दिन पहले लिया संस्थान का जायजा।
झींडा का सेवा संभालने का दावा HSGMC के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने दो दिन पहले संस्थान का अचानक निरीक्षण किया। दावा किया कि हरियाणा कमेटी जल्द संस्थान को अपने अधीन लेगी। झींडा ने पांच दिन पहले संस्थान में मेडिकल कॉलेज और गुरुद्वारा साहिब की स्थापना करने का ऐलान किया था।
SGPC की नीयत ठीक नहीं HSGMC के प्रधान झींडा ने कहा कि SGPC की नीयत ठीक नहीं है। आरोप लगाया कि SGPC संस्थान पर लिया गया 100 करोड़ रुपए का लोन हड़पना चाहती है। 25 साल में SGPC कॉलेज नहीं बना सकी, अब 6 महीने में कैसे तैयार कर लेगी। ये हरियाणा की संगत को गुमराह करने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि SGPC के सेक्रेटरी को कानून की समझ नहीं है। वे पहले कानून पढ़कर आएं। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में हरियाणा के सभी गुरुद्वारे और संस्थान HSGMC के अधीन करने का ऑर्डर दिया है। कानूनन संस्थान पर HSGMC और हरियाणा की संगत का अधिकार है। उधर, कमेटी के चुने हुए मेंबर बलजीत सिंह दादूवाल ने मामले को लेकर सीएम नायब सैनी से मुलाकात की है।