Bal Bhagwat reached International Astrology Research Center | इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजी रिसर्च सेंटर पहुंचे बाल भागवत: श्रीमद्भगवतगीता के रहस्यों को बताया, दीया कुमारी से मुलाकात में गीता सुनाई, गिफ्ट भी दिया – Jaipur News

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जयपुर पहुंचे पांच साल के बाल भागवत ब्रह्मचारी ने श्रीमद्भगवतगीता का प्रचार किया। इस दौरान उन्होंने राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी से सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में भेंट की, जहां गीता के श्लोकों के जरिए भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवादों को

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दोनों जगह ब्रह्मचारी की वाणी और याददाश्त देखकर लोग हैरान रह गए। उन्होंने बताया- उन्हें श्रीमद्भगवतगीता के अलावा अन्य 128 श्लोक कंठस्थ हैं और ये सभी उन्हें उनकी मां ने सिखाए हैं। ब्रह्मचारी स्कूल नहीं जाते, बल्कि एक गुरुकुल में अध्ययन कर रहे हैं। वे GIVE संस्थान से जुड़े हैं और उन्हें ‘भागवत प्रभु’ नाम से भी जाना जाता है।

इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजी रिसर्च सेंटर में ज्योतिषाचार्य पवन शर्मा समेत कई लोगों ने बाल भागवत का स्वागत किया।

इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजी रिसर्च सेंटर में ज्योतिषाचार्य पवन शर्मा समेत कई लोगों ने बाल भागवत का स्वागत किया।

दीया कुमारी से मुलाकात में गीता सुनाई, गिफ्ट भी दिया बाल भागवत ब्रह्मचारी जब दीया कुमारी से मिलने पहुंचे तो उन्होंने कहा कि मैं आपके लिए एक गिफ्ट लाया हूं- श्रीमद्भगवद्गीता। इस पर दीया कुमारी ने मुस्कुराते हुए पूछा कि इसे पढ़ने से क्या होगा? ब्रह्मचारी ने जवाब दिया।आपकी सारी चिंताएं दूर हो जाएंगी। इसके बाद उन्होंने गीता के श्लोकों के साथ महाभारत का एक प्रसंग भी सुनाया। दीया कुमारी ने इस मुलाकात को बेहद प्रेरणादायक बताया और कहा कि इतनी छोटी उम्र में ऐसी समझ और श्रद्धा सचमुच दुर्लभ है।

पांच साल के बाल भागवत ब्रह्मचारी ने उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी को चिंता मुक्त रहने के तरीके भी बताए।

पांच साल के बाल भागवत ब्रह्मचारी ने उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी को चिंता मुक्त रहने के तरीके भी बताए।

कलयुग में नाम जप ही सबसे जरूरी इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजी रिसर्च सेंटर में वृंदावन से आए बाल ब्रह्मचारी ने ज्योतिषाचार्य पवन शर्मा से मिलकर सनातन धर्म, हरिनाम संकीर्तन और वेदों से जुड़ी बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि कलयुग में नाम जप ही मुक्ति का रास्ता है। ज्योतिषाचार्य पवन शर्मा ने बताया- हर हिंदू परिवार में ऐसा एक बच्चा जरूर होना चाहिए जो धर्म ग्रंथों से जुड़ा हो। उन्होंने गुरुकुल परंपरा और वैदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर दिया। ब्रह्मचारी की बातें सुनकर ज्योतिषाचार्य भी भावुक हो गए।

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