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किसानों की योजनाओं में करोड़ों का घोटाला करने वाले दो बड़े अफसरों पर शासन ने सख्त एक्शन लिया है। डिप्टी डायरेक्टर कृषि अभिनंदन सिंह और पूर्व बीएसए (भूमि संरक्षण अधिकारी) संजय सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। दोनों को लखनऊ मुख्यालय अटै
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SIT जांच की सिफारिश, कमिश्नर ने भेजा था पत्र
कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने पूरे घोटाले की जांच SIT से कराने के लिए शासन को पत्र लिखा था। जांच में सामने आया कि दोनों अफसरों ने किसान योजनाओं में 20 करोड़ से ज्यादा की रकम का गबन किया। पूर्व बीएसए संजय सिंह का ट्रांसफर दो महीने पहले बांदा हो चुका था। वहां पर पदस्थ रहते हुए भी उन पर कार्रवाई की गई और लखनऊ अटैच कर दिया गया। वहीं डिप्टी डायरेक्टर कृषि अभिनंदन सिंह बरेली में ही तैनात थे, जिनको शासन ने सस्पेंड कर दिया।
योजनाओं में करोड़ों की निकासी, घटिया काम
जांच में खुलासा हुआ कि संजय सिंह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना और डब्ल्यूडीसी योजना में 15 करोड़ से ज्यादा की धनराशि निकाली। कामों की गुणवत्ता बेहद खराब मिली और मानकों के खिलाफ पाई गई। टीएसी जांच के दौरान संजय सिंह ने अभिलेख उपलब्ध न कराकर अभद्रता भी की।
नीरजा सिंह ने घोटाले पर डालने की कोशिश की चादर
डिप्टी डायरेक्टर भूमि संरक्षण नीरजा सिंह पर भी आरोप है कि उन्होंने जांच को दबाने और संजय सिंह को बेदाग साबित करने की कोशिश की। हालांकि टीएसी जांच में यह चाल कामयाब नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार नीरजा सिंह पर भी कार्रवाई के आसार हैं।
बाबुओं और स्टाफ पर भी जल्द गिरेगी गाज
इन अफसरों के अलावा बरेली भूमि संरक्षण विभाग की महिला अधिकारी, पूर्व जिला कृषि अधिकारी, पूर्व कृषि रक्षा अधिकारी, पूर्व जिला योजना सलाहकार अमित कुमार संधू समेत आधा दर्जन बाबू, गोदाम प्रभारी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।
पांच साल से जारी थी घोटालों की लूट
कृषि और भूमि संरक्षण विभाग में पिछले पांच साल से घोटालों की भरमार थी। बरेली से लेकर लखनऊ निदेशालय तक सब अपने हिस्से की रकम लेकर सरकारी खजाने को चूसते रहे। कई जांचें हुईं लेकिन कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती थी। इस बार प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र कुमार और कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने मामले की तह तक पहुंचकर कार्रवाई करवाई।
किसानों की योजनाओं की रकम निजी खातों में
वर्ष 2022-23 में आत्मा, एनएफएसएम, किसान कल्याण, कृषि सब्सिडी और कृषि गोष्ठियों के नाश्ते-भोजन के लिए आई 25 लाख रुपए की राशि तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र चौधरी के कार्यकाल में सीधे बाबुओं और कर्मचारियों के निजी खातों में ट्रांसफर कर दी गई थी। डिप्टी डायरेक्टर कृषि अभिनंदन सिंह ने वसूली की जगह इन घोटालेबाजों को संरक्षण दिया।
घोटालों का नेटवर्क उजागर
सूत्रों के मुताबिक संजय सिंह ने करोड़ों के काम कराने के नाम पर केवल खानापूरी की। उन्होंने अपने विश्वासपात्र अवर अभियंता को बदायूं से अटैच कराकर कच्चे-पक्के काम कराने के नाम पर धनराशि हड़प ली। इस पूरे नेटवर्क में बाबू, गोदाम प्रभारी और कई अधिकारी शामिल रहे।