Sawai Madhopur Jarawata Trench Ground Story; Jarawata Villege Story | Jarawata Villege Flood | | बारिश से खेत में 80-फीट का गड्ढा बना, मकान ढहे: बोले- भीख मांगने की नौबत आई, सड़क पर रहने को मजबूर; 10 साल बाद आई ऐसी बरसात – Sawai Madhopur News

Actionpunjab
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सवाई माधोपुर में हुई 3 दिन की बारिश थमने के बाद भी हालात बिगड़े हुए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि सूरवाल बांध के ओवरफ्लो हो जाने के बाद पानी यहां गांव में घुसा। इससे 80 फीट चौड़ा और 50 फीट गहरा गड्ढा हो गया है। गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया है

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मौके पर पहुंचे भास्कर ने यहां के लोगों से बात की, उनकी समस्या जानी। लोगों ने जो बताया वो दिल दहला देने वाला था।

गांव के सियाराम कहते हैं- मजदूरी कर कर के लोगों ने अपना घर बनाया था, वो ढह गया अब तो ये मान लो खाने के लाले पड़ गए हैं। भीख मांगने की नौबत आ गई है।

वहीं 2 महिलाएं प्रेग्नेंट हैं, उनके परिजन कैमरे के सामने कहते हैं- जमीन ढह गई, गड्ढा बन गया। महिलाएं गर्भवती हैं, समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया तो मर जाएगी…

दैनिक भास्कर में पढ़िए जड़ावता की ग्राउंड रिपोर्ट…

पहले समझिए कहां हुआ 80*50 का गड्ढा

समझिए कैसे बना गड्ढा

ग्रामीणों का दावा

ग्रामीण श्योजीराम कहते हैं- सूरवाल बांध ओवरफ्लो हैं। इन बांधों से सिंचाई विभाग की छोटी-छोटी नहरें निकलती हैं। जड़ावता में अजनोटी, जटवाड़ा, निंदरदा और बनोटा से पानी आ रहा है। इन 3-4 गांवों का पानी यहां आने लग गया है। सिंचाई विभाग ने नहर की दीवार को छोटा कर दिया है। ऐसे में, वहां से बहकर पानी हमारे गांव की तरफ आने लगा है। उसे अगर बंद कर दिया जाए तो गांव की समस्या ही खत्म हो जाएगी।

10 साल बाद जड़ावता में इतनी बारिश

जल संसाधन एवं सिंचाई विभाग के XEN अरुण कुमार शर्मा ने बताया- नहर छोटी करने जैसी कोई बात नहीं है। स्टेट का टाइम के जितने भी पुराने बांध बने हुए थे उनकी नहर कच्ची और चौड़ी होती थी। जिन्हें सरकार की ओर से पूरे नियमानुसार सक्षम स्तर के अनुमोदन के बाद पक्का किया जा रहा है।

ऐसे में नहर छोटी होने की बात गलत है, फिलहाल सूरवाल बांध की नहर को पक्का किया ही नहीं गया है। अगर पिछले 10 साल के बारिश के आंकड़े देखे तो ऐसा पहली बार हुआ है कि 48 घंटे में जड़ावता में 4.25 MM बारिश दर्ज की गई। जिसके चलते यहां पर यह हालात पैदा हुए हैं।

दो तस्वीरों में समझिए क्या हैं जड़ावता के हालात

तस्वीर, रविवार सुबह की है, यहां तेज बारिश के बाद 80 फीट गहरा गड्ढा बन गया था। प्रकृति के आगे बेबस खड़े ग्रामीण अपना आशियाना ढहते देखते रहे।

तस्वीर, रविवार सुबह की है, यहां तेज बारिश के बाद 80 फीट गहरा गड्ढा बन गया था। प्रकृति के आगे बेबस खड़े ग्रामीण अपना आशियाना ढहते देखते रहे।

पानी पूरे वेग से गांव की तरफ आ रहा था, लेकिन मदद नहीं…

पानी पूरे वेग से गांव की तरफ आ रहा था, लेकिन मदद नहीं…

200 मकानों में पानी भरा, 2 लापता

21 अगस्त की रात 1 बजे सवाई माधोपुर में बारिश शुरू हुई। रुक-रुक कर हो रही बारिश के बाद पूरे जिले में बाढ़ के हालात बन गए थे। अकेले शहर में ही 200 घरों में पानी भर गया था। लोगों को बचने के लिए घरों की छत पर चढ़ना पड़ा था।

गांव भी इससे अछूते नहीं थे। सूरवाल बांध में बारिश के कारण पानी छलका तो 9 लोग इसमें नाव लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने लगे। बीच रास्ते में नाव पलट गई। 7 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया जबकि गोठड़ा पूर्व सरपंच समेत 1 व्यक्ति लापता है।

तस्वीर, गड्ढे की है। 72 घंटों में ये गड्ढा 2 मकानों, 2 मंदिरों और 2 दुकानों को लील गया। गनीमत रही ग्रामीणों ने आपस में मदद कर एक दूसरे को पनाह दी।

तस्वीर, गड्ढे की है। 72 घंटों में ये गड्ढा 2 मकानों, 2 मंदिरों और 2 दुकानों को लील गया। गनीमत रही ग्रामीणों ने आपस में मदद कर एक दूसरे को पनाह दी।

अब बात जड़ावता की जहां आपदा प्रबंधन मंत्री को आना पड़ा…

सवाई माधोपुर से जड़ावता गांव 19 किमी दूर है। यहां अलग-थलग आबादी में 250 मकानों में करीब 2100 लोग रहते हैं। इसी गांव में खेतों की जमीन में 22 अगस्त की देर रात कटाव शुरू हो गया था। ग्रामीण कहते हैं एक बार बताया दो बार बताया और तीसरी बार ये हालत हो गई कि इतनी चौड़ा गड्ढा बन गया। आने जाने रास्ता बंद हो गया और लोगों के मकान ढह गए। अब भी कोई सुध लेने नहीं आया।

जिनके मकान ढहे उनके लिए ग्रामीण ही खाने की व्यवस्था ग्रामीण ही कर रहे हैं। ग्रामीण कहते हैं- एक रात BLO ने खाना पहुंचाया था, उसके बाद वह भी नहीं आए।

जिनके मकान ढहे उनके लिए ग्रामीण ही खाने की व्यवस्था ग्रामीण ही कर रहे हैं। ग्रामीण कहते हैं- एक रात BLO ने खाना पहुंचाया था, उसके बाद वह भी नहीं आए।

4 दिन में गड्ढा 80 फीट चौड़ी हुई

ग्रामीण मुकेश कुमार मीणा बताते हैं- ऐसा मंजर पहली बार देखने को मिला है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इतना पानी आया कि मिट्टी कटने लगी है। इसके बाद देखते ही देखते यहां 80 फीट की गड्ढा बन गया। इससे 2 मकान, 2 दुकानें और 2 मंदिर इसकी जद में आ गए। खाने की व्यवस्था गांव की तरफ से ही की गई है। दूसरे इलाकों से संपर्क कट गया है।

3 दिन में करोड़ों की जमीन गई

ग्रामीण सियाराम कहते हैं- यहां मीठालाल और किरोड़ी का मकान ढह गया। 3 दिन की बारिश में करोड़ों की तो जमीन गई। इसकी भरपाई नहीं होने वाली। पानी पीने का बोरिंग ढह गया।

मीठालाल ने दूसरे के यहां मजदूरी कर कर के ये मकान बनाया था। पूरा मकान ढह गया। अब भीख मांगने के लिए कटोरा भी नहीं रह गया है। हमारे लिए कल भी कोई नहीं आया आज भी कोई नहीं आया। यहां जड़ावता की सरकारी स्कूल है। उस स्कूल की सुध लेने यहां प्रशासन आया था।

सड़क पर रह रहे, पड़ोसियों के यहां खाना खा रहे

ममता कहती हैं- भैरों जी का मंदिर गया, हमारा मकान गया। दो दुकानें भी ढह गई। हमारे पास कोई सामान नहीं है। 3 दिन हो गए हैं सड़क पर रह रहे हैं। पड़ोसी के यहां से खाना खा रहे हैं। हमारा कुछ नहीं बचा, सारा सामान ढह गया।

पिछले 72 घंटों से लगातार पानी बहकर गांव की तरफ आ रहा है। इससे लोग घबराए हुए हैं।

पिछले 72 घंटों से लगातार पानी बहकर गांव की तरफ आ रहा है। इससे लोग घबराए हुए हैं।

महिलाएं प्रेग्नेंट अस्पताल कैसे ले जाएं

भागचंद बताते हैं- गांव में रहने वाले विक्रम की पत्नी आशा और चेतराम की पत्नी सुमन गर्भवती हैं। दोनों को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना जरूरी है। यहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं है। अगर जल्दी से उन्हें अस्पताल ले जाने की सुविधा नहीं मिली तो उनकी मौत भी हो सकती है।

मकान ढह जाने के बाद अपने आशियाने को देखती महिलाएं

मकान ढह जाने के बाद अपने आशियाने को देखती महिलाएं

4 मकान और ढह जाने की आशंका

रामघणी कहतीं हैं- घर के सामने से पिछले 4 दिनों से पानी बह रहा। कहती हैं- यहां कोई सुध लेने आया। मकान ढहने की पूरी संभावना है।

ग्रामीण जेपी कहते हैं- कल डॉ. किरोड़ी यहां आए थे। प्रशासन ने मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए पानी को अलग-अलग दिशा में किया था। अब हमारी ओर पानी ज्यादा आने लगा है। यहां 4 मकान है जिनके अब ढह जाने की आशंका बनी हुई है।

तस्वीर उस मकान की है जो अब ढह जाने की कगार पर है। 10 फीट दूर गड्ढा है। अब अगर बारिश हुई तो यह भी ढह जाएगा।

तस्वीर उस मकान की है जो अब ढह जाने की कगार पर है। 10 फीट दूर गड्ढा है। अब अगर बारिश हुई तो यह भी ढह जाएगा।

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